पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों की घोषणा के महज अड़तालीस घंटों के भीतर ही लोकतंत्र के उत्सव ने रक्तरंजित रूप अख्तियार कर लिया है। उत्तर 24 परगना जिले का संदेशखाली इलाका मंगलवार देर रात उस समय थर्रा उठा, जब शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात सुरक्षाबलों पर हमलावरों ने कायराना हमला कर दिया। सरबेरिया अग्रहाटी ग्राम पंचायत के बामन घेरी इलाके में अंधेरे का फायदा उठाकर किए गए इस हमले ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ही नहीं दिखाई दी, बल्कि सीधे तौर पर राज्य की मशीनरी और केंद्रीय सुरक्षा बलों को चुनौती दी गई। रात के सन्नाटे को चीरती हुई गोलियों की गड़गड़ाहट ने स्पष्ट कर दिया कि चुनावी नतीजे भले ही आ गए हों, लेकिन जमीनी स्तर पर नफरत की आग अभी शांत नहीं हुई है।
गश्त के दौरान घात लगाकर हमला
यह दु:खद घटना नजात पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में उस समय हुई जब पुलिस और सीआरपीएफ की एक संयुक्त टीम इलाके में गश्त कर रही थी। शुरुआती रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि हमलावरों ने योजनाबद्ध तरीके से अधिकारियों को निशाना बनाया। इस अंधाधुंध गोलीबारी में नजात पुलिस स्टेशन के प्रभारी भरत पुरकैत, राजबाड़ी चौकी के कर्मी भास्वत गोस्वामी और एक महिला पुलिस कर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। सुरक्षा के लिहाज से तैनात सीआरपीएफ के दो जवानों को भी गोलियां लगी हैं। घायल कर्मियों को तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए मीनाखा ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया, लेकिन घावों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तत्काल कोलकाता के उन्नत चिकित्सा केंद्रों में रेफर करना पड़ा। खाकी और वर्दी पर हुआ यह हमला क्षेत्र में व्याप्त गहरे तनाव की ओर इशारा कर रहा है।
चुनाव आयोग की सख्ती और कड़े एक्शन की तैयारी
हिंसा की इस भयानक घटना के बाद दिल्ली से लेकर कोलकाता तक प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मामले का संज्ञान लेते हुए पश्चिम बंगाल के शीर्ष अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। आयोग ने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस आयुक्त को सख्त लहजे में निर्देश दिए हैं कि उपद्रवियों के खिलाफ बिना किसी देरी के कार्रवाई की जाए। संदेशखाली में अतिरिक्त बलों की तैनाती कर दी गई है और पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि कानून को अपने हाथ में लेने वालों और हिंसा भड़काने वाले तत्वों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन को आदेश दिया गया है कि वे लगातार गश्त जारी रखें और संवेदनशील इलाकों में छापेमारी कर हथियारों की बरामदगी सुनिश्चित करें।
भय के साये में स्थानीय निवासी और सुरक्षा की चुनौतियां
फिलहाल पूरे संदेशखाली विधानसभा क्षेत्र में तनाव चरम पर है। स्थानीय निवासियों के बीच डर का माहौल व्याप्त है और बाजार व गलियां सूनी पड़ी हैं। दोपहर से ही सुलग रही अशांति ने आधी रात को खूनी रूप ले लिया, जिससे स्थानीय प्रशासन की इंटेलिजेंस विफलता भी सामने आई है। पुलिस अब उन संदिग्धों की पहचान करने में जुटी है जिन्होंने सुरक्षाबलों पर हमला किया। इस घटना ने एक बार फिर बंगाल की राजनीति में 'पोस्ट-पोल वायलेंस' यानी चुनाव बाद हिंसा के काले अध्याय को ताजा कर दिया है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब इस हिंसा की आग को फैलने से रोकना और आम जनता के मन में सुरक्षा का भाव पैदा करना है, जो फिलहाल गोलियों की गूंज के नीचे दबा हुआ महसूस हो रहा है।
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