पश्चिम एशिया के रणक्षेत्र में बदल जाने की आहट ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को दांव पर लगा दिया है। इजरायल द्वारा ईरान के गैस फील्ड को निशाना बनाने और जवाबी कार्रवाई की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। ब्रेंट क्रूड का 111 डॉलर के पार जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आने वाले दिन उपभोक्ताओं के लिए भारी पड़ने वाले हैं। इसी उथल-पुथल के बीच भारतीय तेल विपणन कंपनियों ने शुक्रवार को प्रीमियम पेट्रोल के दामों में अचानक बढ़ोतरी कर आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि यह वृद्धि फिलहाल केवल पावर और एक्सपी95 जैसे हाई-ऑक्टेन फ्यूल तक सीमित है, लेकिन इसे आने वाले बड़े संकट की पूर्वपीठिका माना जा रहा है।

प्रीमियम उपभोक्ताओं पर महंगाई का दोहरा वार

​हिंदुस्तान पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल जैसी दिग्गज कंपनियों ने अपने प्रीमियम वेरिएंट्स की कीमतों में 2.09 रुपए से लेकर 2.35 रुपए प्रति लीटर तक का इजाफा कर दिया है। इस बदलाव के बाद अब ब्रांडेड ईंधन की कीमतें 113 रुपए प्रति लीटर के स्तर को पार कर गई हैं। गौर करने वाली बात यह है कि यह बढ़ोतरी 20 मार्च की पिछली तारीख से ही प्रभावी मानी जा रही है। तेल कंपनियों का यह फैसला उन वाहन मालिकों के लिए किसी झटके से कम नहीं है जो बेहतर इंजन क्षमता और स्मूद ड्राइविंग के लिए इन खास ईंधनों पर निर्भर रहते हैं। मेट्रो शहरों में रहने वाले और हाई-परफॉर्मेंस बाइक्स व कार चलाने वाले लोगों की जेब पर इसका सीधा और गहरा असर पड़ना तय है।

सामान्य पेट्रोल-डीजल की स्थिरता और बढ़ता दबाव


Advertisement

​राहत की बात फिलहाल इतनी है कि कंपनियों ने सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों को हाथ नहीं लगाया है। लेकिन बाजार के जानकारों का मानना है कि यह राहत अधिक समय तक टिकने वाली नहीं है। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है और जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 111 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहेंगी, तब तक घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ता ही जाएगा। तेल कंपनियों द्वारा प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में की गई यह वृद्धि दरअसल बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता को मैनेज करने की एक कोशिश है। यदि कतर और ईरान जैसे महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों के आसपास सैन्य गतिविधियां बढ़ती हैं, तो सामान्य पेट्रोल की कीमतों को स्थिर रख पाना सरकार और कंपनियों के लिए नामुमकिन हो जाएगा।

ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की अनिश्चितता

​वर्तमान परिदृश्य को देखें तो यह केवल कीमतों में बढ़ोतरी का मामला नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के टूटने का डर है। 19 मार्च को तेल की कीमतों में आई 4 प्रतिशत की उछाल ने यह साफ कर दिया है कि बाजार किसी भी अप्रिय घटना को लेकर कितना संवेदनशील है। विशेषज्ञों की मानें तो अगर युद्ध की स्थिति और बिगड़ती है, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम फिर से अनियंत्रित हो सकते हैं। फिलहाल प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में लगी यह आग इस बात का इशारा है कि वैश्विक राजनीति की तपिश अब भारतीय रसोई और सड़कों तक पहुंचने लगी है।

---समाप्त---