भारतीय उपभोक्ताओं के लिए आज सुबह एक बार फिर महंगाई का नया झटका लेकर आई। देश की सरकारी तेल कंपनियों ने लगातार चौथी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला किया है। सुबह छह बजे से लागू हुई नई दरों के बाद देश के लगभग सभी प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम आसमान छूने लगे हैं। पिछले दो हफ्तों के भीतर यह चौथा मौका है जब आम जनता की जेब पर इस तरह का सीधा बोझ डाला गया है। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली सहित कई महानगरों में तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। दिल्ली में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में ढाई रुपये से अधिक का इजाफा देखा गया है, जिसने मध्यम वर्ग और परिवहन क्षेत्र की चिंताएं बेहद बढ़ा दी हैं।

महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक महंगाई की मार

इस संशोधन के बाद दिल्ली में अब पेट्रोल सौ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है। कोलकाता और पटना जैसे शहरों में स्थिति और भी गंभीर है, जहां पेट्रोल की कीमतें एक सौ तेरह रुपये प्रति लीटर के पार चली गई हैं। मुंबई और बेंगलुरु में भी वाहन चालकों को अपनी जेब काफी ढीली करनी पड़ रही है। उत्तर प्रदेश के नोएडा और लखनऊ के साथ-साथ हरियाणा के गुरुग्राम में भी तेल के दामों में ढाई रुपये से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। बिहार की राजधानी पटना में तो कीमतों में तीन रुपये से भी ज्यादा का उछाल आया है, जो देश में आज की सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक है। इस अचानक आई तेजी से हर शहर का नागरिक परेशान है क्योंकि इसका सीधा असर दैनिक बजट पर पड़ रहा है।

क्या देश में बीस से पच्चीस रुपये तक बढ़ सकते हैं दाम?

लगातार हो रही इस बढ़ोतरी के बीच अब आम जनता और बाजार के गलियारों में यह सबसे बड़ा सवाल तैर रहा है कि क्या आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बीस से पच्चीस रुपये प्रति लीटर तक का भारी उछाल देखने को मिल सकता है। ऊर्जा विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों की मानें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में पश्चिम एशिया संकट और विशेष रूप से होर्मुज जलडमरू मध्य में तेल आपूर्ति बाधित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में पचास प्रतिशत से अधिक की जो तेजी आई है, उसका पूरा बोझ अभी तक घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है। सरकारी तेल कंपनियों को हो रहे दैनिक नुकसान की भरपाई के लिए अभी कुछ और चरणों में कीमतों का बढ़ना तय माना जा रहा है। हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि पच्चीस रुपये जैसी एकमुश्त या बहुत बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम है क्योंकि सरकार और तेल कंपनियां आम जनता को चौतरफा झटके से बचाने के लिए बेहद नपे-तुले और छोटे टुकड़ों में दाम बढ़ाने की रणनीति अपना रही हैं, बशर्ते अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अत्यधिक नियंत्रण से बाहर न हो जाएं।

दो हफ्तों के भीतर ईंधन के रेट में भारी बदलाव

अगर पिछले पंद्रह दिनों के घटनाक्रम पर नजर डालें तो ईंधन की कीमतों में यह बदलाव बेहद अप्रत्याशित और तेज रहा है। मध्य मई के दौरान लगभग चार साल में पहली बार तेल की कीमतों में एकमुश्त तीन रुपये तक की भारी बढ़ोतरी की गई थी। उसके ठीक बाद दो अलग-अलग चरणों में नब्बे-नब्बे पैसे का इजाफा और किया गया। कुल मिलाकर देखें तो पिछले दो हफ्तों के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में साढ़े सात रुपये प्रति लीटर से ज्यादा की कुल बढ़ोतरी हो चुकी है। इतने कम समय में इतनी बड़ी वृद्धि ने बाजार विश्लेषकों और आम उपभोक्ताओं दोनों को चौंका दिया है। परिवहन लागत बढ़ने से अब रोजमर्रा की अन्य आवश्यक वस्तुओं के भी महंगे होने की आशंका गहरा गई है।


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वैश्विक बाजार और कच्चे तेल का पेचीदा गणित

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आ रही भारी तेजी को इस घरेलू मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण बताया जा रहा है। फरवरी के महीने से लेकर अब तक वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पचास प्रतिशत से भी ज्यादा का उछाल आ चुका है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई कमजोरी ने भी सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव को दोगुना कर दिया है। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आज ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट दोनों में ही करीब चार प्रतिशत की गिरावट देखी गई है, जिससे कच्चे तेल के दाम दो हफ्ते के निचले स्तर पर आ गए हैं। इसके बावजूद भारतीय बाजारों में पुरानी लागत के दबाव के चलते दाम बढ़ाए गए हैं।

आम जनता की बढ़ती परेशानियां और आगे की राह

पेट्रोल और डीजल के महंगे होने का सीधा असर सिर्फ वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता। देश की अर्थव्यवस्था में माल ढुलाई के लिए डीजल को रीढ़ की हड्डी माना जाता है। डीजल की कीमतों में ढाई से तीन रुपये की इस नई वृद्धि के बाद अब फल, सब्जियां, दूध और अन्य जरूरी सामानों के परिवहन का खर्च बढ़ जाएगा। व्यापारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में खुदरा बाजारों में महंगाई का एक नया दौर देखने को मिल सकता है। फिलहाल वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की ताजा गिरावट अगर आगे भी जारी रहती है, तो शायद आने वाले समय में आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत की उम्मीद मिल सकती है, लेकिन मौजूदा स्थिति जनता के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

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