बिहार में निर्माणाधीन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के धराशायी होने और हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को वैशाली जिले के लालगंज क्षेत्र में भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बन रही फोरलेन सड़क (NH-139W) के निर्माण स्थल पर एक और भयानक दुर्घटना सामने आई है। निर्माणाधीन पुल पर लोहे के गर्डर को सेट करने वाला भारी-भरकम लॉन्चर अचानक नीचे आ गिरा, जिसकी चपेट में आकर वहां काम कर रहे सात मजदूर बुरी तरह घायल हो गए। हादसे के बाद निर्माण स्थल पर अफरातफरी मच गई और लोहे की वजनी संरचना के नीचे दबे मजदूरों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग राहत कार्य के लिए दौड़े।
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए मलबे और लोहे के भारी हिस्सों के बीच से घायलों को बाहर निकाला। सभी घायल मजदूरों को तुरंत पास के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां से गंभीर रूप से जख्मी चार मजदूरों को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक दो मजदूरों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। घटना स्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि अगर ग्रामीणों ने तुरंत रेस्क्यू शुरू न किया होता, तो मजदूरों की जान जाना तय था।
इस दुर्घटना के बाद स्थानीय निवासियों का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने निर्माण कंपनी के अधिकारियों व ठेकेदारों पर सीधे तौर पर लापरवाही का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों (Safety Protocols) की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। मजदूरों को न तो पर्याप्त हेलमेट, बेल्ट या सुरक्षा किट दी गई थी और न ही भारी मशीनरी के संचालन के दौरान जरूरी एहतियाती उपाय किए गए थे। लोगों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि ठेकेदार जल्दबाज़ी में घटिया निर्माण सामग्री और बिना विशेषज्ञ निगरानी के जोखिम भरा काम करवा रहे हैं।
दूसरी ओर, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और निर्माण कंपनी ने शुरुआती बयान में इसे तकनीकी खराबी का मामला बताया है। अधिकारियों का तर्क है कि मूल पुल के ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, बल्कि गर्डर शिफ्टिंग के दौरान लॉन्चर के सपोर्ट फेल होने से यह घटना हुई। हालांकि, राज्य में पिछले कुछ समय में भागलपुर के अगुआनी घाट पुल से लेकर कई छोटे-बड़े पुलों के ध्वस्त होने के रिकॉर्ड को देखते हुए इस दलील पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बार-बार होते ऐसे हादसों से अब भारतमाला जैसे 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के भव्य ड्रीम प्रोजेक्ट्स की विश्वसनीयता पर भी आंच आने लगी है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और निर्माण स्थल को सील कर दिया है। पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच के आदेश दिए गए हैं, ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाई जा ने वाली निर्माण कंपनी और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
---समाप्त---