कैथेड्रल रोड पर आयोजित तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस समारोह को लेकर राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा कार्यक्रम के संबंध में तय की गई शर्तों के कथित उल्लंघन के मामले में राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और आयोजकों पर मामला दर्ज किया गया है। हेस्टिंग्स थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर अपू बैद्य की शिकायत के आधार पर यह कानूनी कार्रवाई की गई है। एफआईआर में आपराधिक साजिश रचने और अदालत के निर्देशों की अवहेलना करने के आरोप शामिल हैं।
हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की अदालत ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले लोगों की संख्या अधिकतम पंद्रह सौ तक सीमित रखने का आदेश दिया था। इसके बावजूद कार्यक्रम स्थल पर निर्धारित सीमा से कहीं अधिक भीड़ जुट गई। एफआईआर में कहा गया है कि आयोजकों और मुख्य वक्ताओं ने अदालत के स्पष्ट दिशानिर्देशों की अनदेखी की, जिसके कारण स्थिति अनियंत्रित हो गई।
सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस से धक्का-मुक्की
कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस का दावा है कि रैली के दौरान समर्थकों का गुस्सा अचानक भड़क उठा, जिसके बाद टीएमसीपी कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेड्स तोड़ दिए। इस दौरान भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई और धक्का-मुक्की भी हुई। इस घटनाक्रम के चलते पूरे इलाके में काफी देर तक अफरातफरी का माहौल बना रहा।
राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
मामला सामने आने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। टीएमसी नेता कुणाल घोष ने एफआईआर को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित करार दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी अदालत के आदेशों का पूरा सम्मान करती है और नियमों का पालन करने का प्रयास किया गया था। घोष के अनुसार, जनसभाओं में उम्मीद से अधिक लोगों का आ जाना स्वाभाविक है और भीड़ को संभालना पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ लेने की नीयत से मुख्यमंत्री का नाम इस मामले में घसीटा जा रहा है।
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