बिहार सरकार द्वारा आयोजित रोजगार मेले में बड़े दावों के साथ एक युवती को निजी कंपनी का जॉइनिंग लेटर सौंपा गया था। उज्ज्वल भविष्य का सपना लिए जब पीड़िता दिल्ली पहुँची, तो वहाँ का नजारा पूरी तरह से अलग था। युवती का आरोप है कि दिल्ली के तय पते पर पहुँचते ही उसे एक कमरे में बंद कर दिया गया और उस पर कॉलगर्ल का काम करने का मानसिक दबाव बनाया जाने लगा।
कमरे में बंद करके वीडियो कॉल
पीड़िता ने शुरुआत में बताया कि दिल्ली पहुँचने के बाद कंपनी के लोगों ने उसकी आजादी छीन ली। उसे एक कमरे में कैद कर दिया गया और मोबाइल के जरिए अनजान लड़कों से आपत्तिजनक वीडियो कॉल करने पर मजबूर किया जाने लगा। जब युवती ने इस काम से साफ इनकार किया, तो उस पर दबाव और बढ़ा दिया गया। किसी तरह छिपकर उसने अपने परिजनों को फोन पर इस पूरे खौफनाक मंजर की जानकारी दी, जिसके बाद परिवार ने तुरंत पुलिस और प्रशासन से मदद मांगी।
बारह घंटे में बदला बयान
मामला मीडिया में आते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। हालांकि, खबर के सुर्खियां बनते ही महज 12 घंटे के भीतर कहानी में एक नया मोड़ आ गया। पुलिस और मीडिया के सामने दोबारा आई पीड़िता ने अपने शुरुआती बयानों से पूरी तरह यू-टर्न ले लिया। युवती ने नया बयान देते हुए कहा कि काम का माहौल संदिग्ध लगने के कारण उसने नौकरी छोड़ी थी और देह व्यापार के लिए कोई जबरदस्ती नहीं की गई थी।
दबाव और सुरक्षा पर सवाल
अचानक बदले इस बयान के बाद कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि पीड़िता या उसके परिवार पर किसी बड़े नेटवर्क का दबाव हो सकता है। इस पूरे वाकये ने सरकारी आयोजनों में आने वाली निजी प्लेसमेंट एजेंसियों की विश्वसनीयता और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के तार खंगालने और सच तक पहुँचने में जुटी है।
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