उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में उस समय बड़ा भूचाल आ गया, जब यूट्यूब चैनल 'टॉप सीक्रेट' पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना विभाग के लिए काम करने वाली एक एजेंसी की पूर्व कर्मचारी का साक्षात्कार प्रसारित हुआ। मुख्यमंत्री के सूचना तंत्र की क्रिएटिव एजेंसी 'फेमस इनोवेशन' से जुड़ी रही इस पीड़िता ने 'टॉप सीक्रेट' के कैमरे के सामने न सिर्फ अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की दास्तान बयां की, बल्कि सरकारी संरक्षण में चल रहे कथित राजनीतिक दुष्प्रचार के ठिकानों की पोल भी खोल दी।

कार्यस्थल पर प्रताड़ना का आरोप

​पीड़िता ने 'टॉप सीक्रेट' पर अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि काम के दौरान उसे गलत नीयत से छूने का प्रयास किया गया और आपत्तिजनक बातें कही गईं। जब उसने इस अवांछित व्यवहार का कड़ा विरोध किया, तो उसे नौकरी से निकाल दिया गया। विरोध करने पर उसे साफ शब्दों में धमकी दी गई कि यह फैसला विशाल सिंह का है और वह कहीं भी चली जाए, उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा। महिला ने दुखी होकर सवाल उठाया कि जिस उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहां मुख्यमंत्री के लिए काम करने वाली महिला ही सुरक्षित नहीं है। विशाल सिंह द्वारा उसके बारे में अत्यंत आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा गया कि वह सांपों के साथ सोती है, जिसे पीड़िता ने किसी भी महिला के लिए बेहद वीभत्स और मर्महत करने वाला बताया।

एआई क्लिप्स से दुष्प्रचार


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​यौन उत्पीड़न के अलावा पीड़िता ने सूचना विभाग के भीतर चल रहे गंदे राजनीतिक खेल की आँखों देखी गवाही भी दी। उसके मुताबिक, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की छवि खराब करने के लिए विभाग में बेहद आपत्तिजनक एआई क्लिप्स तैयार करवाई जाती थीं। इन क्लिप्स में पूर्व मुख्यमंत्री को लोग गाली देते, दौड़ाते और मारते हुए दिखाई देते थे। पीड़िता का दावा है कि विशाल सिंह इस पूरे दुष्प्रचार कैंपेन के मास्टरमाइंड हैं और उन्हें ऐसी अमर्यादित एआई क्लिप्स बेहद पसंद आती हैं।

अपनों को भी बनाया निशाना

​हैरान करने वाली बात यह है कि इस राजनीतिक वेंडेटा का शिकार केवल विपक्षी नेता ही नहीं बने, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के अपने ही वरिष्ठ नेताओं को भी बख्शा नहीं गया। पीड़िता ने कैमरे पर ऑन रिकॉर्ड पुष्टि की कि उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ भी इसी तरह की टारगेटेड रणनीति अपनाई गई थी।

गोमती नगर से संचालन

​पीड़िता ने उन तमाम गुप्त ठिकानों के पते उजागर किए हैं जहां से यह पूरा नेटवर्क चलाया जाता है। राजभवन के नजदीकी कार्यालय से लेकर गोमती नगर में सीएमएस के पास स्थित दफ्तर तक का खुलासा किया गया है। गोमती नगर वाले दफ्तर में सरकारी खर्चे पर करीब पचास से साठ लोगों की एक खास टीम तैनात की गई है, जिसका इकलौता काम सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ दुष्प्रचार और चरित्र हनन की पटकथा लिखना है। 'टॉप सीक्रेट' के माध्यम से साक्ष्यों के साथ सामने आए इन खुलासों ने शासन-प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है।

विभागीय रुख की प्रतीक्षा और अस्वीकरण

​हालांकि, ये सभी आरोप पूरी तरह से यूट्यूब चैनल 'टॉप सीक्रेट' पर पीड़िता द्वारा ऑन-कैमरा दिए गए बयान और दावों पर आधारित हैं। इस पूरे मामले पर सूचना विभाग, संबंधित एजेंसी 'फेमस इनोवेशन' या विशाल सिंह की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। हमारा संस्थान किसी भी व्यक्ति या संस्था पर लगाए गए इन आरोपों की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है। निष्पक्ष पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करते हुए, यदि संबंधित विभाग, एजेंसी या आरोपित अधिकारियों द्वारा इस संदर्भ में कोई पक्ष या सफाई जारी की जाती है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

अगर आप इस मुद्दे से जुड़ा पूरा इंटरव्यू देखना चाहते हैं तो नीचे दिए लिंक पर जाएं।  https://youtu.be/pvpySCwryeE?si=OmxyXf_C4I4-luub 

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