बिलासपुर में शताब्दी वर्ष पुराने भाखड़ा डैम के पानी निकासी वाले गेटों के पिलर्स में गंभीर दरारें आने और सुरक्षा बंदा क्षतिग्रस्त होने के बाद राजनीतिक घमासान मच गया है। हादसे के तुरंत बाद से ही सत्तापक्ष के नेताओं और जनप्रतिनिधियों का घटनास्थल पर तांता लगा रहा। हर कोई प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कागजी समीक्षा करने और मौके से ही दिशा-निर्देश देता दिखाई दिया। मौके की तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित कर जनसेवक वाली छवि चमकाने की होड़ लगी रही, लेकिन मूल समस्या का ठोस हल कोई नहीं बता पाया।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि समस्या के स्थायी समाधान पर विचार करने के बजाय हर कोई अपनी मौजूदगी दर्ज कराने और फोटो सेशन में व्यस्त है। प्रभावित पिलर्स और क्षतिग्रस्त हिस्से के पास खड़े होकर बयानबाजी करने का सिलसिला लगातार जारी है। एक तरफ जहां सत्तापक्ष के नेता जनसुरक्षा और त्वरित मरम्मत का आश्वासन दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों के नेता मौके पर ही दूसरे राज्यों से पत्रकारों को बुलाकर बाइट्स और इंटरव्यू देने में जुटे हैं।

विपक्षी दल के एक नेता ने क्षेत्रीय विधायक को घेरते हुए सीधा हमला बोला है। मौके से ही दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि जिस रास्ते से पानी का अस्वाभाविक रिसाव हुआ है, वह महज कोई तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि 'भ्रष्टाचार की सुरंग' है। वह सुरंग कहां जा रही है, किसी को नहीं पता। विपक्षी नेता का यह भी आरोप है कि जीर्णोद्धार और ऑटोमेटिक गेट लगाने के नाम पर स्वीकृत बजट में व्यापक स्तर पर घपलेबाजी हुई है। इसके साथ ही निर्माण कार्यों में पचास फीसदी तक कमीशनखोरी का सनसनीखेज आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई है।

गंभीर राजनीतिक आरोपों और तीखी बयानबाजी के बीच संबंधित विभाग स्थिति पर काबू पाने की जुगत में लग गया है। जल प्रवाह के कारण कटकर धंस चुकी पुलिया के बड़े गड्ढे को भरने के लिए मौके पर जेसीबी मशीनें तैनात कर दी गई हैं। मलबे और मिट्टी से गड्ढे को समतल करने का काम तेजी से चलाया जा रहा है। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि केवल मिट्टी से गड्ढा पाट देना तात्कालिक राहत तो दे सकता है, लेकिन जब तक पिलर्स की कंक्रीट जीर्णोद्धार और स्ट्रक्चरल मजबूती नहीं की जाएगी, तब तक यह खतरा बना रहेगा।


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