रामपुर जनपद को औद्योगिक तरक्की की नई राह पर ले जाने के दावों के बीच चमरौआ विधानसभा क्षेत्र अचानक सुर्खियों में आ गया है। प्रशासनिक गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, इस क्षेत्र में एक विशाल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर स्थापित करने की योजना पर अंदरखाने काम चल रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गोरखपुर-शामली कॉरिडोर के किनारे राज्य के तीन जिलों में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसमें एक जिला रामपुर भी शामिल है। चर्चा है कि जिला प्रशासन द्वारा इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट के लिए जरूरी जमीनों का चिह्नांकन तेजी से पूरा किया जा रहा है और जल्द ही इसकी विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर जिम्मेदार अधिकारियों ने अभी पूरी तरह खामोशी साध रखी है और किसी भी स्तर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

​भौगोलिक और सामरिक दृष्टि से यह परियोजना रामपुर के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण इसकी शानदार कनेक्टिविटी है। प्रस्तावित इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के ठीक नजदीक से गोरखपुर-शामली "हाई स्पीड एक्सेस कॉरिडोर" गुजरने जा रहा है, जो इसे सीधे पूर्वांचल और हरियाणा से जोड़ेगा। वर्तमान में इस नए हाइवे के एलाइनमेंट का काम तेजी से चल रहा है। एलाइनमेंट के दौरान ही इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए विशेष पॉइंट छोड़े जाएंगे, ताकि भविष्य में बिना किसी बाधा के सीधी कनेक्टिविटी स्थापित की जा सके। इसके अलावा दिल्ली-नैनीताल नेशनल हाईवे और बाजपुर-मुरादाबाद हाईवे भी इस औद्योगिक क्षेत्र के लिए वरदान साबित होंगे।

​औद्योगिक विकास और कनेक्टिविटी की इस नई आहट के बीच क्षेत्र में रियल एस्टेट से जुड़े लोगों की हलचल काफी तेज हो गई है। स्थानीय नेताओं, प्रापर्टी डीलरों और भू-माफियाओं के गिरोह इस संभावित इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के मुहाने पर पड़ने वाली जमीनों पर नजरें गड़ाए बैठे हैं। सीधे-साधे ग्रामीणों को गुमराह करके या अग्रिम राशि का लालच देकर उनकी उपजाऊ जमीनों को औने-पौने दामों में हथियाने का खेल शुरू हो चुका है। चर्चा इस बात की भी है कि कई रसूखदार लोगों ने बेनामी संपत्तियों के जरिए बड़े पैमाने पर सौदे पक्के करने शुरू कर दिए हैं।

​इस पूरे सट्टेबाजी के खेल के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े फायदे देखे जा रहे हैं। पहला गणित सरकारी अधिग्रहण के वक्त मिलने वाले भारी-भरकम मुआवजे का है। नए नियमों के तहत औद्योगिक विकास के लिए ली जाने वाली जमीनों पर किसानों को बाजार दर से कई गुना अधिक मुआवजा दिया जाता है। प्रापर्टी डीलर और नेता सस्ते में जमीन खरीदकर सरकारी खजाने से बड़ा मुनाफा कमाने की फिराक में हैं। दूसरी वजह इस क्षेत्र की कमर्शियल वैल्यू है। कॉरिडोर और हाईवे के संगम पर ढाबे, होटल, लॉजिस्टिक्स यार्ड और रिहायशी कॉलोनियों की मांग बढ़ेगी, जिससे जमीनों की कीमतें रातों-रात आसमान छूने लगेंगी।


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​इस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए जिस जमीन के एक्वायर किए जाने की संभावना जताई जा रही है, उसका प्रशासनिक ढांचा काफी उलझा हुआ है। दरअसल यह प्रभावित क्षेत्र तहसील स्वार, ब्लॉक बिलासपुर और विधानसभा चमरौआ के अंतर्गत आता है। अलग-अलग तहसील, ब्लॉक और विधानसभा क्षेत्र में फैले होने के कारण स्थानीय ग्रामीण और किसान पूरी तरह भटके हुए हैं। किसानों को समझ नहीं आ रहा है कि वे अपनी आपत्तियों, सुझावों या अन्य जरूरी प्रशासनिक लिखा-पढ़ी के लिए आखिर किस दफ्तर के चक्कर लगाएं।

​सही और आधिकारिक जानकारी न होने के कारण ग्रामीण प्रापर्टी डीलरों के बिछाए जाल में भी फंस रहे हैं। जानकारों का कहना है कि जब तक शासन की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक जमीनों के सटीक गाटा नंबर और प्रशासनिक प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होगी। ऐसे में जल्दबाजी में अपनी जमीनें बेचने वाले किसान भविष्य के बड़े फायदे से वंचित रह सकते हैं। 

बेरोजगारी का दंश झेल रहे इस जिले में बीते तीन-चार वर्षों के दौरान कई नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुई हैं। शासन स्तर पर वित्त मंत्री के विशेष फोकस के चलते रामपुर में औद्योगिक माहौल तैयार होने लगा है। आंकड़ों की मानें तो आने वाले दिनों में जिले के अंदर 748 नई औद्योगिक इकाइयां शुरू होने की संभावना है। इसके लिए स्थानीय प्रशासन को कुल 8560.55 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों के एमओयू प्राप्त हो चुके हैं। यदि ये सभी प्रस्ताव धरातल पर उतरते हैं तो उनसे लगभग 43,145 लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकेगा। फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासनिक सर्वे, एलाइनमेंट के काम और शासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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