उत्तराखंड में हथियारों का फर्जी लाइसेंस सिंडिकेट बेनकाब, भारी मात्रा में अवैध हथियार बरामददेवभूमि उत्तराखंड में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसमें फर्जी दस्तावेजों के जरिए शस्त्र लाइसेंस हासिल कर घातक हथियार जुटाए जा रहे थे। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम की कार्रवाई से यह खुलासा हुआ है कि यह रैकेट लंबे समय से सक्रिय था और अब जांच उत्तर प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों तक पहुंच गई है।पुलिस के अनुसार, अपराधी बाहरी राज्यों के फर्जी पतों पर पहले लाइसेंस बनवाते थे और फिर उन्हें उत्तराखंड में ट्रांसफर कर वैधता का आवरण देते थे। इस रणनीति का मकसद कानून प्रवर्तन एजेंसियों की नजरों से बचकर हथियारों का संग्रह करना था।

लावारिस कार से हथियारों का जखीरा बरामद

​इस अभियान के तहत काशीपुर के कटोराताल इलाके में एक लावारिस खड़ी संदिग्ध स्विफ्ट कार (नंबर यूके 18 पी 5046) की तलाशी ली गई। कार से भारी मात्रा में अवैध हथियार और गोला-बारूद बरामद हुआ। पुलिस ने बताया कि कार में एक 12 बोर पंप एक्शन बंदूक, एक .22 बोर सेमी ऑटोमैटिक राइफल, एक .32 बोर सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल, एक .32 बोर रिवॉल्वर, 237 जिंदा कारतूस, चार मैगजीन और सात फर्जी शस्त्र लाइसेंस मिले।

प्रभावशाली परिवार के सदस्यों पर मामला दर्ज

​ये हथियार और दस्तावेज काशीपुर के एक प्रभावशाली परिवार के सदस्यों से जुड़े बताए जा रहे हैं। पुलिस ने सौरभ अग्रवाल, उनके भाई गौरव अग्रवाल (दोनों राकेश अग्रवाल के पुत्र) और सौरभ की पत्नी दीप्ति अग्रवाल का नाम लिया है। इनके खिलाफ मामले दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन हथियारों का इस्तेमाल या सप्लाई किन लोगों तक हुआ था।

अंतरराज्यीय स्तर पर सघन जांच शुरू

​उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर राज्य के विभिन्न जिलों में बाहरी राज्यों से ट्रांसफर हुए सभी शस्त्र लाइसेंसों की सघन जांच चल रही है। एसटीएफ की टीम उत्तर प्रदेश के दो दर्जन से अधिक जिलों के रिकॉर्ड खंगाल रही है। अधिकारियों का मानना है कि गिरफ्तार व्यक्ति इस बड़े सिंडिकेट की सिर्फ एक कड़ी हैं। जाली सत्यापन करने वाले अधिकारियों, हथियार डीलरों और अन्य प्रभावशाली लोगों तक पहुंचने के लिए छानबीन तेज कर दी गई है।


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सुरक्षा को लेकर पुलिस की अपील और सख्त रुख

​यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और लोक व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर माना जा रहा है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसी कोई संदिग्ध गतिविधि देखने पर तुरंत सूचना दें। अधिकारियों ने जोर दिया कि इस तरह के फर्जीवाड़े को जड़ से खत्म करने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। प्रारंभिक जांच से संकेत मिल रहे हैं किउ यह नेटवर्क व्यवस्थित ढंग से काम कर रहा था और इसमें कागजी प्रक्रिया को कानूनी रूप देने की पूरी कोशिश की गई थी। आगे की जांच से और खुलासे होने की संभावना है।

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