उत्तराखंड में अवैध हथियारों और फर्जी दस्तावेजों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में स्पेशल टास्क फोर्स को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। लंबे समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा कुख्यात प्रॉपर्टी डीलर सौरभ अग्रवाल अब कानून के शिकंजे में है। कुमाऊं क्षेत्र के रुद्रपुर और काशीपुर में अपनी जमीनी डीलिंग्स को लेकर चर्चाओं में रहने वाले इस रसूखदार आरोपी को एसटीएफ ने एक खुफिया ऑपरेशन के दौरान दबोच लिया। इस कार्रवाई के बाद से ही क्षेत्र के भू-माफियाओं और अवैध रूप से हथियार रखने वाले सफेदपोशों में हड़कंप मच गया है।
रात का ऑपरेशन
गिरफ्तारी की यह बड़ी कार्रवाई रुद्रपुर के रोडवेज बस अड्डे के पास बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दी गई। एसटीएफ की टीम को मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली थी कि आरोपी शहर छोड़ने की फिराक में है। देर रात की गई इस छापेमारी में न सिर्फ मुख्य आरोपी सौरभ अग्रवाल को दबोचा गया, बल्कि उसके हर कदम पर साथ देने वाले निजी ड्राइवर अमित पाल को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। ड्राइवर पर इस पूरे मामले से जुड़े अहम साक्ष्यों और सबूतों को मिटाने का आरोप है।
हथियारों का जखीरा
जांच टीम ने जब आरोपियों की घेराबंदी कर उनकी तलाशी ली, तो उनके पास से आधुनिक और घातक हथियारों का जखीरा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। पुलिस ने मौके से एक ऑटोमैटिक पंप एक्शन बंदूक, दो अलग-अलग बोर की स्वचालित पिस्टल और कई जिंदा कारतूस अपने कब्जे में लिए हैं। इन हथियारों के साथ ही सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उनके पास से दो ऐसे शस्त्र लाइसेंस भी मिले जो पूरी तरह से जाली थे। इसके अलावा पूर्व में जब्त की गई लग्जरी कार की चाबियां भी पुलिस ने बरामद की हैं।
सिंडिकेट के मास्टरमाइंड की तलाश
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें पिछले महीने काशीपुर में हुई एक बड़ी बरामदगी से जुड़ी हुई हैं। मई के शुरुआती हफ्ते में एक पार्किंग स्थल के भीतर लावारिस हालत में खड़ी गाड़ी से पुलिस ने भारी मात्रा में असलहे और सात जाली लाइसेंस बरामद किए थे। कड़ियों को जोड़ने पर पता चला कि यह सभी कागजात सौरभ ने अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर फर्जी तरीके से बनवाए थे। तभी से पुलिस की कई टीमें इस सिंडिकेट के मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी हुई थीं।
कई बड़े चेहरे होंगे बेनकाब
एसटीएफ के आला अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए प्रॉपर्टी डीलर ने शुरुआती पूछताछ में ही कई ऐसे राज उगले हैं जो आने वाले दिनों में कई बड़े चेहरों को बेनकाब कर सकते हैं। इस रैकेट के तार केवल इन्हीं दो लोगों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें सरकारी विभागों के कुछ कर्मचारियों और अन्य सहयोगियों के शामिल होने का अंदेशा है। पुलिस अब इन आरोपियों को रिमांड पर लेकर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि आखिर इन फर्जी लाइसेंसों को बनाने का मुख्य स्रोत क्या था और इन हथियारों का इस्तेमाल किस बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए किया जाना था।
प्रशासन ने किया सख्त रुख अख्तियार
राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि फर्जी तरीके से बंदूक के लाइसेंस हासिल करने वालों के खिलाफ पूरे प्रदेश में एक व्यापक जांच चल रही है। इस अवैध धंधे को जड़ से खत्म करने के लिए अब तक तीन अलग-अलग प्राथमिकियां दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस प्रशासन इस मामले में बेहद सख्त रुख अख्तियार किए हुए है और साफ कर दिया गया है कि कानून को ठेंगा दिखाकर सुरक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी रसूखदार को बख्शा नहीं जाएगा।
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