उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कुदरत का मिजाज एक बार फिर कड़ा रुख अपनाता दिख रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून की ओर से जारी सात दिवसीय पूर्वानुमान के मुताबिक राज्य के विभिन्न हिस्सों में अगले कई दिनों तक बादलों की आवाजाही के साथ झमाझम बारिश की स्थिति बनी रहेगी। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि 12 सितंबर तक प्रदेश के अधिकांश जिलों में रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला लगातार जारी रहेगा। इस दौरान कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम तो कुछ संवेदनशील इलाकों में मूसलाधार बारिश लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती है।
संवेदनशील जिलों में अलर्ट
7 सितंबर को राज्य के निचले और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम बेहद खराब रहने का अनुमान जताया गया है। नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत, ऊधमसिंह नगर, पौड़ी और चमोली जिलों में भारी वर्षा को लेकर विशेष अलर्ट जारी किया गया है। 8 और 9 सितंबर को हालांकि बारिश की तीव्रता में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना बनी रहेगी। इसके तुरंत बाद 10 से 12 सितंबर के बीच एक बार फिर मानसून की सक्रियता बढ़ेगी और कई क्षेत्रों में तेज बारिश का नया दौर शुरू होगा।
पहाड़ी इलाकों में खतरा
लगातार हो रही बारिश के कारण पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। तेज बारिश की स्थिति में पहाड़ों से मलबा गिरने और अचानक भूस्खलन होने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे मुख्य मार्ग और ग्रामीण सड़कें बाधित होने की आशंका बनी रहती है। इसके अतिरिक्त नदी-नालों और स्थानीय गदेरों का जलस्तर अचानक बढ़ने से तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा पैदा हो जाता है। स्थानीय प्रशासन ने नदी किनारे जाने पर पूरी तरह से रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं।
सुरक्षा और जरूरी सावधानियां
मौसम की इस अनिश्चितता को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। पहाड़ों की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वे सफर शुरू करने से पहले मौसम के ताजा अपडेट और मार्गों की स्थिति की जानकारी अवश्य जुटा लें। खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर शरण लें और बिजली चमकने के समय खुले मैदानों अथवा बड़े पेड़ों के नीचे बिल्कुल न खड़े रहें। संयम और सतर्कता बरतकर ही किसी भी संभावित दुर्घटना से बचा जा सकता है।
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