भानु प्रताप पब्लिक स्कूल परिसर में युवा छात्राओं के बीच स्वास्थ्य जागरूकता, आत्मविश्वास और सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक अत्यंत जानकारीपूर्ण और प्रभावशाली कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह विशेष कार्यक्रम सुबह दस बजे से दोपहर बारह बजे तक पूरी गरिमा के साथ संपन्न हुआ। इस अनूठी पहल को मुख्य रूप से किशोरियों को उनके शारीरिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक विकास के महत्वपूर्ण वर्षों में सही मार्गदर्शन देने के लिए तैयार किया गया था, ताकि वे समाज में अधिक जागरूक, आत्मविश्वासी और सशक्त बनकर उभर सकें।

प्रेरणादायक थीम के साथ सशक्तिकरण की नई पहल

​यह पूरा जागरूकता कार्यक्रम “सशक्त बेटियाँ, आत्मविश्वास से भरा कल” की प्रेरणादायक थीम के तहत आयोजित किया गया था। इस सत्र में युवा लड़कियों के जीवन में आत्म-प्रेम, आत्मविश्वास, तंदुरुस्ती, ज्ञान और आपसी सहयोग के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। स्कूल प्रशासन की इस दूरदर्शी पहल का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को एक ऐसा सुरक्षित, सहायक और शैक्षिक वातावरण प्रदान करना था, जहाँ वे बिना किसी झिझक के किशोरावस्था और व्यक्तिगत स्वच्छता से संबंधित विषयों पर खुलकर सीख सकें, आपस में सार्थक बातचीत कर सकें और अपने मन में उठने वाले प्रश्नों के उत्तर पा सकें।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका सिंगरोरे का विशेष संबोधन


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​इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में क्षेत्र की जानी-मानी स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका सिंगरोरे उपस्थित रहीं। उन्होंने अत्यंत संवेदनशीलता, आत्मीयता और व्यावसायिकता के साथ स्कूल की छात्राओं को संबोधित किया। अपने विस्तृत और संवादात्मक सत्र के दौरान उन्होंने मासिक धर्म स्वच्छता, एचपीवी की रोकथाम, टीकाकरण जागरूकता और किशोरावस्था के दौरान बरती जाने वाली उचित स्वास्थ्य देखभाल जैसे गंभीर विषयों पर गहन और वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की। उन्होंने छात्राओं को समझाया कि किशोरावस्था के इन संवेदनशील वर्षों में व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना, संतुलित पोषण लेना, मानसिक तंदुरुस्ती का ध्यान रखना और सकारात्मक आत्म-सम्मान विकसित करना कितना आवश्यक है। उन्होंने लड़कियों को बिना किसी संकोच के स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर चर्चा करने के लिए प्रेरित किया।

शंका समाधान और छात्राओं की सक्रिय भागीदारी

​डॉक्टर का यह विशेष सत्र छात्राओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम में बड़े उत्साह और जिज्ञासा के साथ भाग लिया। लड़कियों ने डॉक्टर के साथ सक्रिय रूप से संवाद स्थापित किया और किशोरावस्था, शारीरिक व भावनात्मक परिवर्तनों तथा दैनिक स्वास्थ्य देखभाल की पद्धतियों से संबंधित अपनी कई शंकाओं का तुरंत समाधान किया। इस पूरी कार्यशाला का सुंदर संचालन और सफल समन्वय श्रीमती दीपिका रस्तोगी द्वारा किया गया। उनके निरंतर प्रयासों और समर्पण ने कार्यक्रम के सुचारू आयोजन को सुनिश्चित किया, जबकि स्कूल के अन्य शिक्षकों और कर्मचारियों ने भी पूरे सत्र के दौरान छात्रों को प्रेरित करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।

प्रधानाचार्य महेश चंद्रा का दूरदर्शी नेतृत्व

​इस सफल आयोजन के बाद स्कूल के प्रधानाचार्य महेश चंद्रा के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया गया, जिनकी नवीन शैक्षिक रणनीतियाँ, छात्र-केंद्रित योजनाएँ और दूरदर्शी नेतृत्व विद्यालय में छात्रों के लिए सार्थक सीखने के अवसर लगातार सृजित कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में स्कूल नियमित रूप से ऐसे जागरूकता कार्यक्रम, व्यक्तित्व विकास सत्र और व्यावहारिक कार्यशालाएँ आयोजित करता रहता है, जिनका मुख्य उद्देश्य न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता प्राप्त करना है, बल्कि छात्रों के भावनात्मक, सामाजिक और शारीरिक कल्याण को भी पूरी तरह सुनिश्चित करना है।

भविष्य की चुनौतियों के लिए मानसिक मजबूती

प्रधानाचार्य ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि किशोरावस्था मानव जीवन के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण चरणों में से एक है। यह शैक्षणिक संस्थानों की नैतिक ज़िम्मेदारी है कि वे छात्रों को सही ज्ञान, आत्मविश्वास और सहयोग के साथ सही दिशा दिखाएँ। उनका मानना है कि ऐसी कार्यशालाएँ छात्राओं को अधिक जागरूक, अनुशासित, ज़िम्मेदार और मानसिक रूप से मज़बूत बनने में मदद करती हैं, जिससे वे भविष्य की सभी सामाजिक और व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना पूरे आत्मविश्वास और सकारात्मकता के साथ कर पाती हैं। कार्यक्रम का समापन एक सशक्त संदेश के साथ हुआ, जिसने बेटियों के मन में आत्मविश्वास की नई ऊर्जा का संचार किया।

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