उधमसिंह नगर के रुद्रपुर स्थित त्रिशूल चौक पर बारावफात जुलूस के दौरान गूंजी आवाज ने देवभूमि के शांत माहौल में न सिर्फ तीखी गर्मी पैदा कर दी है, बल्कि यह सवाल भी छोड़ दिया है कि क्या सतह के नीचे असंतोष और बगावत की कोई बड़ी आग सुलग रही है। रामपुर निवासी मुफ्ती मुजीब की तल्ख बयानबाजी और मदरसों को छूने पर सीधे अंजाम भुगतने की धमकी ने साफ कर दिया है कि प्रशासनिक फैसलों और सरकारी कार्रवाइयों को लेकर एक बड़ा वर्ग अंदर ही अंदर उबल रहा है।
इंटरनेट मीडिया पर तेजी से फैले वीडियो में मुफ्ती का लहजा केवल धर्म की तालीम देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह आक्रामक अंदाज में चेतावनी देते नजर आए। मदरसों पर किसी भी तरह की आंच आने की सूरत में खुलेआम परिणाम भुगतने की बात कहना और ईदगाह की जमीन वापस मांगने के लिए भरे मंच से तेवर दिखाना इस बात की ओर इशारा करता है कि प्रशासनिक सख्ती के खिलाफ अब सीधी चुनौती पेश की जाने लगी है। चौक के बीचों-बीच हजारों की भीड़ के सामने बोले गए ये शब्द किसी छिटपुट घटना के बजाय एक रणनीति के तहत उकेरे गए आक्रोश जैसे प्रतीत हो रहे हैं।
इस तीखे तेवर के बाद पुलिस और शासन प्रशासन में भी खलबली मच गई है। सीओ सिटी विभव सैनी ने आनन-फानन में धारा 196(2) के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना एसआई दीपक कौशिक को सौंप दी है। खेड़ा स्थित मदरसे में तालीम देने वाले मुफ्ती के इस बयान के बाद इलाके में सामाजिक और धार्मिक ध्रुवीकरण की लकीरें गहरी होती दिख रही हैं। स्थानीय राजनीति में भी भूचाल आ गया है और जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी भरे अंदाज में पलटवार करना शुरू कर दिया है।
कानून व्यवस्था पर सीधा हमला
यह पूरी घटना राज्य में कानून-व्यवस्था के इकबाल को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा करती है। सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मुहिम और अवैध कब्जों पर प्रशासन के चलाए जा रहे डंडे के बीच ऐसी तकरीरें यह दर्शाती हैं कि तुष्टिकरण की राजनीति के खात्मे का दावा करने वाली सरकार के फैसलों से एक खास गुट खुद को किनारे खड़ा महसूस कर रहा है। इसी हताशा और विरोध ने अब मंचों से धमकियों का रूप लेना शुरू कर दिया है, जो किसी बड़े बगावती रूप की ओर संकेत कर रहा है।
सरकार की कड़ा रुख और अल्टीमेटम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उबलते माहौल पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ संदेश दिया है कि संविधान और कानून से ऊपर उठकर माहौल बिगाड़ने की साजिशों को किसी भी कीमत पर कुचला जाएगा। चंपावत जाने से पहले मुख्यमंत्री ने सीधे शब्दों में कहा कि यह केवल एक भाषण का मामला नहीं, बल्कि कानून को खुली चुनौती देने वाली बगावती मानसिकता का प्रश्न है। 13 हजार एकड़ से अधिक भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराने का आंकड़ा रखते हुए उन्होंने यह साफ कर दिया कि तुष्टिकरण का दौर अब खत्म हो चुका है और इस तरह की धमकियों के आगे सरकार अपने कदम पीछे नहीं खींचेगी। उन्होंने कहा कि वो दिन गुजर गये, जब वोटों के लिए सरकारी जमीनों पर कब्जे कराए जाते थे।
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