शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती विभिन्न प्रमुख मार्गों पर की गई थी। इसी सिलसिले में नैनीताल रोड पर उपनिरीक्षक राम सिंह और सहायक उपनिरीक्षक बलवंत सिंह वाहनों की जांच कर रहे थे। चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मियों ने बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चला रहे कुछ युवकों को रोका। नियमों के तहत चालान काटने के बजाय दोनों अधिकारियों ने वाहन चालकों से बातचीत शुरू कर दी और मामला रफा-दफा करने का प्रयास किया।

सरकारी वाहन की डिग्गी में रखे रुपये

​प्रत्यक्षदर्शियों और घटनाक्रम के अनुसार, बातचीत के बाद एक युवक ने पुलिस के आधिकारिक बुलेट वाहन की डिग्गी में कुछ रुपये डाल दिए। इसके तुरंत बाद उपनिरीक्षक राम सिंह मौके पर पहुंचे और बिना कोई वैधानिक कार्रवाई किए वाहन लेकर वहां से रवाना हो गए। चालान की कार्रवाई न करके अनुचित लाभ लेने की इस घटना से पुलिस महकमे की छवि धूमिल हुई।

जांच रिपोर्ट पर एसएसपी का कड़ा फैसला


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​घटना की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचते ही मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए गए। यातायात निरीक्षक ने पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट में उपनिरीक्षक और सहायक उपनिरीक्षक पर लगे आरोपों की पुष्टि हुई। रिपोर्ट मिलने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया।

अनुशासनहीनता पर सख्त रुख

​वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली में किसी भी प्रकार की अनियमितता, भ्रष्टाचार या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस बल की विश्वसनीयता बनाए रखना प्राथमिक कर्तव्य है। आम जनता के साथ गलत व्यवहार करने या नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मियों पर आगे भी इसी तरह की सख्त दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।

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