शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले भानु प्रताप स्कूल ने अब कला की दुनिया में भी एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विद्यालय के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं ने प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय कला प्रतियोगिता रंगोत्सव 2025–26 में सम्मिलित होकर अपनी असाधारण कल्पनाशीलता का प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने रंगों और रेखाओं के माध्यम से अपनी रचनात्मक सोच को इस प्रकार उकेरा कि निर्णायक मंडल भी उनके कौशल का कायल हो गया। यह उपलब्धि विद्यालय द्वारा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर दिए जा रहे विशेष ध्यान को रेखांकित करती है।
राष्ट्रीय पटल पर गौरवान्वित उपलब्धि
प्रतियोगिता के परिणामों ने विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण में उत्साह की लहर दौड़ाई है। कक्षा नौवीं की छात्रा पलक चंद्रा ने अपनी उत्कृष्ट कलाकृति के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त कर एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। उनकी इस सफलता ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि प्रतिभा को सही दिशा और अवसर मिले तो वह किसी भी बड़े मंच पर अपना प्रभाव छोड़ सकती है। पलक की इस उपलब्धि को पूरे क्षेत्र में कला के प्रति बढ़ते रुझान के रूप में देखा जा रहा है।
प्रतिभा को मिले विशिष्ट सम्मान
सृजनात्मकता के मामले में विद्यालय के कनिष्ठ वर्ग के छात्रों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। कक्षा पांच की छात्रा अंशिका सैनी को उनकी अद्भुत और विशिष्ट कला शैली के लिए एक्सेंट्रिक परफॉर्मर अवॉर्ड से नवाजा गया। इसके साथ ही प्रतिष्ठा दास, हृदया पाठक और कृतिका पंत जैसे नन्हे कलाकारों ने अपनी बारीक कलाकारी और रंगों के सटीक तालमेल से आर्ट मेस्ट्रो अवॉर्ड हासिल किया। इन पुरस्कारों ने बच्चों के भीतर छिपी मौलिकता और उनकी मेहनत को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान प्रदान की है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्णिम सफलता
विद्यालय की सफलता का दायरा केवल राष्ट्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रहा बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी छात्रों ने मेडल जीतकर अपनी धाक जमाई। वरुण अग्रवाल, आयुष्मान खन्ना, कृषि तिवारी, रुद्र सिंह, हृदय और आदित्य भट्ट ने अपनी कलात्मक प्रखरता का परिचय देते हुए इंटरनेशनल मेडल प्राप्त किए। इन छात्रों के साथ-साथ अन्य प्रतिभागियों के प्रयासों को भी विद्यालय प्रबंधन ने सराहा। कला शिक्षिका श्रीमती नीलम रानी का उचित मार्गदर्शन और निरंतर प्रोत्साहन इस स्वर्णिम सफलता का मुख्य आधार बना है।
प्राचार्य का प्रेरणादायी संबोधन
पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान प्राचार्य महेश चंद्रा ने विजेता छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि कला केवल एक शौक नहीं बल्कि अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों के निरंतर परिश्रम और अटूट समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह सफलता केवल एक शुरुआत है और आने वाले समय में ये छात्र कला की दुनिया में और भी ऊंचे मुकाम हासिल करेंगे। विद्यालय परिवार की ओर से दी गई इस बधाई ने विद्यार्थियों के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
---समाप्त---