ओडिशा में राकेश टिकैत को हिरासत में लिए जाने की खबर मिलते ही रामपुर जनपद में किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। जिले के प्रमुख केंद्रों पर मोर्चा संभालते हुए भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। रामपुर के थाना केमरी में जिलाध्यक्ष जगजीत सिंह गिल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान जमा हुए और वहीं जमीन पर बैठकर अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान कर दिया। इसी प्रकार, बिलासपुर कोतवाली के बाहर जिला संयोजक गुरचरन सिंह सिद्धू ने कमान संभाली और सैकड़ों समर्थकों के साथ थाने का घेराव किया। इन दोनों ही स्थानों पर किसानों की भारी मौजूदगी और गूंजते नारों ने रात के सन्नाटे में प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह अलर्ट मोड पर ला दिया।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लामबंदी
विरोध की यह लहर केवल रामपुर तक सीमित नहीं रही, बल्कि देखते ही देखते पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अपनी चपेट में ले लिया। बागपत जिले में किसानों का आक्रोश चरम पर दिखा, जहां शहर के मुख्य थाने के साथ-साथ खेकड़ा, दोघट, छपरौली और चांदीनगर थानों पर भी किसानों ने विशाल धरना शुरू कर दिया। इन क्षेत्रों में किसानों की भारी भीड़ ने सड़कों और थाना परिसरों को पूरी तरह घेर लिया। कार्यकर्ताओं का स्पष्ट मत था कि जब तक उनके नेता सुरक्षित वापस नहीं आते, वे किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे।
शामली और हापुड़ में घेराव
शामली जनपद में भी स्थिति काफी गंभीर बनी रही, जहां विरोध प्रदर्शन केवल शहर तक सीमित नहीं रहा। यहां शहर कोतवाली के अलावा आदर्शमंडी, झिंझाना, कैराना, गढ़ीपुख्ता, थानाभवन और बाबरी जैसे महत्वपूर्ण थानों में किसान जत्थे बनाकर धरने पर बैठ गए। इसी तरह हापुड़ जिले में भी गढ़, सिंभावली, बाबूगढ़ और पिलखुआ थानों पर किसानों ने डेरा डाल लिया। इन सभी स्थानों पर भारी नारेबाजी और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन देखने को मिला। किसानों की एकजुटता ने यह स्पष्ट कर दिया कि संगठन का नेटवर्क जमीनी स्तर पर कितना सक्रिय है।
सहारनपुर से बुलंदशहर तक असर
सहारनपुर में भी किसानों ने अपनी शक्ति का परिचय दिया, जहां नागल, छुटमलपुर, सरसावा, सदर और जनकपुरी जैसे थानों के साथ-साथ रामपुर मनिहारान कोतवाली में भी कार्यकर्ताओं ने घेराव किया। बुलंदशहर में जिलाध्यक्ष चौधरी अरब सिंह के नेतृत्व में दर्जनों किसानों ने खुर्जा नगर कोतवाली का घेराव कर अपना विरोध दर्ज कराया। वहीं बिजनौर में शहर कोतवाली के भीतर जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। देर रात तक यूपी के लगभग हर बड़े जनपद में पुलिस थानों के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और किसानों की भीड़ जमा रही।
रिहाई और आंदोलन का समापन
जैसे-जैसे रात बढ़ती गई, देशव्यापी दबाव का असर साफ दिखने लगा। आखिरकार मेरठ व रामपुर के जिलाध्यक्षों ने देर रात करीब सवा बारह बजे यह राहत भरी सूचना साझा की कि राकेश टिकैत को ओडिशा पुलिस ने ससम्मान रिहा कर दिया है। नेता की रिहाई की खबर मिलते ही रामपुर के बिलासपुर और केमरी सहित सभी धरना स्थलों पर हर्ष की लहर दौड़ गई। संगठन के उच्च नेतृत्व की ओर से सूचना मिलते ही सभी जिलों में थानों और कोतवालियों के बाहर चल रहे धरने और विरोध प्रदर्शनों को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया।
---समाप्त---