तमिलनाडु की सियासत में पिछले छह दशकों से चला आ रहा डीएमके और एआईएडीएमके का एकाधिकार शनिवार को पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। सिनेमाई पर्दे के सुपरस्टार जोसेफ विजय ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल आर.एन. रवि से मुलाकात की और बहुमत का जादुई आंकड़ा पार करने वाले विधायकों का समर्थन पत्र औपचारिक रूप से पेश किया। राजभवन के आधिकारिक सूत्रों ने पुष्टि की है कि राज्यपाल ने विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर लिया है और शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं। यह जीत महज एक राजनीतिक उलटफेर नहीं है बल्कि उस विचारधारा की जीत है जिसे विजय ने अपनी पार्टी टीवीके के गठन के समय प्रदेश की जनता के सामने रखा था। चेन्नई की सड़कों पर समर्थकों का सैलाब उमड़ पड़ा है और इसे दक्षिण भारत की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

विजय ने किया 118 का आंकड़ा पूरा 

​विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद सरकार बनाने को लेकर जो अनिश्चितता बनी हुई थी वह आज पूरी तरह समाप्त हो गई। विजय की पार्टी ने अकेले दम पर शानदार प्रदर्शन किया था लेकिन बहुमत के लिए आवश्यक 118 के आंकड़े तक पहुंचने के लिए कुछ सहयोगियों की आवश्यकता थी। राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ-साथ कुछ निर्दलीय विधायकों ने विजय के नेतृत्व में विश्वास जताते हुए समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। राज्यपाल को सौंपे गए दस्तावेजों में 118 विधायकों की स्पष्ट सूची शामिल है जिससे यह साफ हो गया है कि प्रदेश में अब एक स्थिर और नई विचारधारा वाली सरकार बनने जा रही है। विपक्षी खेमे में इस अप्रत्याशित गठबंधन ने खलबली मचा दी है क्योंकि अब तक माना जा रहा था कि सत्ता की चाबी पुराने स्थापित दलों के पास ही रहेगी।

10 मई की डेडलाइन और विजय का राजतिलक

तमिलनाडु की 16वीं विधानसभा का कार्यकाल 10 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। नियम के अनुसार संवैधानिक संकट से बचने के लिए इससे पहले नई सरकार का गठन या राष्ट्रपति शासन की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

​वहीं नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह रविवार को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में आयोजित किया जा सकता है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं क्योंकि इस समारोह में न केवल प्रदेश के प्रमुख नेता बल्कि फिल्मी दुनिया की बड़ी हस्तियों के भी पहुंचने की संभावना है। विजय ने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे इस जीत को शालीनता से मनाएं और आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न होने दें। इस शपथ ग्रहण के साथ ही तमिलनाडु में उस शासन व्यवस्था का अंत हो जाएगा जो बारी-बारी से दो क्षेत्रीय दलों के इर्द-गिर्द घूमती थी। आम जनता को विजय से काफी उम्मीदें हैं क्योंकि उन्होंने अपने चुनाव अभियान में भ्रष्टाचार मुक्त शासन और सामाजिक न्याय का वादा प्रमुखता से किया था।


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विजय के सामने ​भविष्य की चुनौतियां

​मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुधारना और अपने चुनावी वादों को धरातल पर उतारना होगा। तमिलनाडु जैसे राज्य में जहां राजनीति और सिनेमा का गहरा संबंध रहा है वहां एक सक्रिय अभिनेता का सीधे सत्ता के शीर्ष पर पहुंचना कई सवाल भी खड़े करता है। आलोचकों का मानना है कि प्रशासनिक अनुभव की कमी विजय के लिए बाधा बन सकती है लेकिन उनके समर्थकों का दावा है कि विजय की साफ-सुथरी छवि और युवाओं में उनकी लोकप्रियता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विजय किस तरह से अपनी कैबिनेट का गठन करते हैं और किन अनुभवी चेहरों को अपनी टीम में जगह देते हैं। फिलहाल पूरा दक्षिण भारत इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए तैयार खड़ा है।

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