तमिलनाडु की सियासत में एक नए युग की आहट के साथ ही विधानसभा में बुधवार को भारी हंगामा देखने को मिला। नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विश्वास प्रस्ताव पेश किया। सत्ता के इस शक्ति प्रदर्शन में जहां एक ओर कांग्रेस और वामपंथी दलों ने आधिकारिक रूप से टीवीके सरकार के पक्ष में खड़े होने का फैसला किया, वहीं राज्य की प्रमुख क्षेत्रीय शक्ति डीएमके ने विजय के नेतृत्व को चुनौती देते हुए कड़ा रुख अपनाया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही यह साफ हो गया था कि राज्य के राजनीतिक समीकरणों में एक बड़ा बदलाव आ चुका है और गठबंधन की नई लकीरें खींची जा रही हैं।
65 प्रतिशत जनता अब भी इस विचारधारा के विरुद्ध- स्टालिन
विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने टीवीके की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य की बड़ी आबादी ने वर्तमान सरकार के पक्ष में मतदान नहीं किया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए सदन को बताया कि कुल 4.93 करोड़ मतदाताओं में से केवल 1.72 करोड़ लोगों ने ही टीवीके को समर्थन दिया है। स्टालिन का तर्क था कि 65 प्रतिशत जनता अब भी इस विचारधारा के विरुद्ध है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस पार्टी के पास बहुमत के लिए आवश्यक 118 सीटें नहीं हैं, वह नैतिक आधार पर शासन करने का अधिकार खो चुकी है। विजय की दो सीटों से चुनाव लड़ने और एक सीट छोड़ने के फैसले को भी विपक्ष ने जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात करार दिया है।
विपक्ष ने बताया 'मजबूरी का गठबंधन'
वर्तमान परिस्थितियों में टीवीके के पास विधायकों की संख्या कम होने के बावजूद उसे अन्य दलों का सहयोग मिल रहा है। डीएमके का आरोप है कि कांग्रेस और वामपंथी दलों ने केवल इसलिए बाहर से समर्थन दिया है ताकि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने की स्थिति पैदा न हो। विपक्ष ने इसे एक 'मजबूरी का गठबंधन' बताया है। स्टालिन ने इस बात पर भी चिंता जताई कि सरकार बनाने की प्रक्रिया में लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की गई है। उनका आरोप था कि टीवीके ने विपक्षी खेमे के विधायकों को उनके नेतृत्व को सूचित किए बिना अपने पाले में करने की कोशिश की है, जो स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
मंत्रियों के पदों को लेकर बड़ी सौदेबाजी का आरोप
विधानसभा में चर्चा के दौरान एआईएडीएमके के विभाजन का मुद्दा भी प्रमुखता से छाया रहा। उदयनिधि स्टालिन ने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए एआईएडीएमके को दो हिस्सों में बांट दिया गया है। उन्होंने चुनावी घोषणापत्र का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि चुनाव प्रचार के दौरान वह जिस पार्टी का नाम तक लेना पसंद नहीं करते थे, आज उसी के नेताओं के साथ गुप्त मुलाकातें कर रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि पर्दे के पीछे मंत्रियों के पदों को लेकर बड़ी सौदेबाजी चल रही है। इन तमाम आरोपों के बीच डीएमके ने सदन से वॉकआउट करने का फैसला किया, जिससे टीवीके के लिए बहुमत की राह और आसान हो गई।
जनकल्याणकारी योजनाओं के राजनीतिकरण का आरोप
सदन छोड़ने से पहले विपक्ष के नेता ने मुख्यमंत्री विजय से एक विशेष आग्रह किया कि पिछली सरकार द्वारा शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं का राजनीतिकरण न किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीएमके का विरोध केवल सत्ता के समीकरणों को लेकर है, न कि जनता के हितों को लेकर। अब जबकि टीवीके ने विश्वास मत हासिल कर लिया है, राज्य की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि फिल्म जगत से राजनीति के शीर्ष तक पहुंचे विजय किस तरह इन चुनौतियों का सामना करते हैं। गठबंधन के भीतर के अंतर्विरोध और विपक्ष का आक्रामक रुख आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।
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