बुलंदशहर के बहुचर्चित हाईवे गैंगरेप और लूटपाट के मामले में उत्तर प्रदेश की एक विशेष अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए न्याय की मिसाल पेश की है। अदालत ने इस जघन्य वारदात में शामिल पांच मुख्य दोषियों जुबैर, साजिद, धर्मवीर, नरेश और सुनील को उम्रकैद यानी आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला उस लंबी कानूनी लड़ाई का परिणाम है जो पिछले कई वर्षों से जारी थी और जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था।

इस खौफनाक वारदात की शुरुआत 29 जुलाई 2016 की रात को हुई थी जब नोएडा से शाहजहांपुर जा रहा एक परिवार बुलंदशहर के पास नेशनल हाईवे पर बदमाशों का शिकार बना। अपराधियों ने साजिश के तहत सड़क पर लोहे की रॉड फेंककर परिवार की कार रुकवाई और फिर पूरे परिवार को बंधक बनाकर पास के खेतों में ले गए। वहां बदमाशों ने न केवल परिवार के साथ मारपीट और लूटपाट की बल्कि मानवता को शर्मसार करते हुए मां और उनकी नाबालिग बेटी के साथ गैंगरेप जैसी दरिंदगी को अंजाम दिया। इस घटना के बाद तत्कालीन सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठे थे।

मामले की जांच के दौरान कुल 11 आरोपियों के नाम सामने आए थे लेकिन न्याय की यह डगर काफी जटिल रही। इन आरोपियों में से एक की मौत सुनवाई के दौरान ही हो गई थी जबकि दो अन्य आरोपी पुलिस के साथ हुए एनकाउंटर में मारे गए थे। जांच के दौरान तीन और नाम प्रकाश में आए थे जिनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। सीबीआई और स्थानीय पुलिस द्वारा जुटाए गए पुख्ता सबूतों और गवाहों की गवाही के आधार पर अदालत ने जुबैर, साजिद, धर्मवीर, नरेश और सुनील को दोषी पाया और उन्हें सलाखों के पीछे भेजने का आदेश दिया।

​अदालत के इस फैसले से पीड़ित परिवार को आठ साल के लंबे इंतजार के बाद इंसाफ मिला है। यह फैसला न केवल अपराधियों के मन में कानून का खौफ पैदा करेगा बल्कि उन परिवारों के लिए भी एक बड़ी राहत है जिन्होंने उस भयावह रात के घाव झेले थे। कानूनी जानकारों का मानना है कि ऐसे जघन्य मामलों में उम्रकैद जैसी सख्त सजा समाज में सुरक्षा की भावना को मजबूत करती है और अपराधियों के दुस्साहस पर लगाम लगाती है।


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