बिहार सरकार ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारी छात्रों को बड़ी राहत दी है। बिहार के गृह विभाग ने एक पत्र जारी कर 26 जुलाई शाम 6 बजे से पहले दर्ज मुकदमे वापिस लेने का फैसला लिया गया है। इस दौरान हिरासत में लिए गए छात्रों को भी रिहा किया जाएगा।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने बिहार सरकार के इस संवेदनशील और सकारात्मक फैसले का खुलकर स्वागत किया है। पार्टी प्रवक्ता सौरव दास ने वीडियो जारी कर कहा कि कि सरकार द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और गिरफ्तार युवाओं को तुरंत रिहा करने का यह कदम छात्रहित में एक सराहनीय और न्यायसंगत निर्णय है, जिससे युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने में बड़ी मदद मिलेगी।
हिंसक प्रदर्शन के बाद शुरू हुई थी कार्रवाई
राज्य में बंद के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद पुलिस प्रशासन ने पूरी तरह से शिकंजा कसना शुरू कर दिया था। कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर पुलिस राज्यभर में उपद्रवियों और प्रदर्शनकारियों की धरपकड़ में जुट गई थी। इस कार्रवाई को पुख्ता बनाने के लिए पुलिस महकमा सीसीटीवी फुटेज, आधुनिक ड्रोन कैमरों और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे विभिन्न वीडियो की मदद ले रहा था, ताकि हिंसा में शामिल एक-एक चेहरे की पहचान कर उन पर कानूनी शिकंजा कसा जा सके। पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल सैकड़ों स्टूडेंट्स के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज कर ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां शुरू कर दी थीं।
राजनीतिक दबाव और आक्रामक तेवर
इस दमनकारी कार्रवाई के खिलाफ विपक्ष और छात्र संगठनों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया था। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार को दो टूक चेतावनी दी थी कि यदि गिरफ्तार छात्रों को तुरंत रिहा नहीं किया गया और मुकदमे वापस नहीं लिए गए, तो पार्टी की ओर से एक बहुत बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। इसी कड़ी में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी पटना में आक्रामक तेवर दिखाते हुए इस अन्याय के खिलाफ सड़क पर उतरकर बड़े आंदोलन करने की कड़ी घोषणा कर दी थी। दिल्ली से लेकर पटना तक बने इस भारी राजनीतिक दबाव के आगे आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा।
गृह विभाग की आधिकारिक विज्ञप्ति

राजनीतिक और सामाजिक दबाव के चलते बिहार सरकार के गृह विभाग को आधिकारिक तौर पर कदम उठाना पड़ा। विशेष सचिव क्षत्रनील सिंह, भा०पु०से० द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नीट परीक्षाओं से जुड़े विरोध प्रदर्शनों और उच्च शिक्षा क्षेत्र में सुधार की मांगों के मद्देनजर सरकार ने कई महत्वपूर्ण आश्वासन और निर्देश दिए हैं कि दिनांक 26 जुलाई 2026 की संध्या 6 बजे से पूर्व बिहार राज्य में इस विरोध प्रदर्शन में शामिल किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध सरकार कोई दंडात्मक, प्रतिशोधात्मक या प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी। इस समयावधि से पहले प्रदर्शन के दौरान व्यक्तियों के विरुद्ध दर्ज सभी प्राथमिकियों, परिवादों और कारण बताओ नोटिसों को वापस लेने की विधिक प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू की जाएगी। इसके अलावा, निर्धारित समय से पूर्व दर्ज मामलों में गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए सभी व्यक्तियों को शीघ्र जेल से रिहा किया जाएगा तथा भविष्य में भी इन मामलों में नामित व्यक्तियों के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष कार्रवाई नहीं की जाएगी।
छात्रों और युवाओं की जीत
सरकार के इस फैसले को छात्र संगठनों, विपक्षी नेताओं और आम युवाओं की एक ऐतिहासिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। CJP और अन्य राजनीतिक दलों द्वारा समय पर उठाई गई मुखर आवाज़ और बड़े आंदोलन की हुंकार ने प्रशासन को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया। इस विज्ञप्ति के सामने आने के बाद छात्र समुदाय ने बड़ी राहत की सांस ली है और इसे न्याय की एक बड़ी जीत करार दिया है।
अन्य राज्यों का हाल बेहाल
बिहार में सरकार द्वारा राहत भरे आदेश जारी कर दिए जाने के बाद, अब सबकी निगाहें देश के अन्य हिस्सों पर टिकी हुई हैं। हालांकि अभी अन्य राज्यों की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जहां-जहां छात्रों को हिरासत में लिया गया है या उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों का यह मानना है कि यह नियम केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अन्य राज्यों की सरकारों को भी छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए ऐसा ही सकारात्मक कदम उठाना चाहिए।
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