मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसानों का आक्रोश अब अपने चरम पर पहुंच गया है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के आह्वान और विभिन्न किसान संगठनों के नेतृत्व में हजारों की संख्या में किसान तमाम पुलिसीय रुकावटों और बहुस्तरीय बैरिकेडिंग को पार करते हुए भोपाल की सीमा में दाखिल हो चुके हैं। नर्मदापुरम, हरदा, रायसेन और सीहोर जैसे जिलों से आए ये किसान एक सप्ताह का राशन, बर्तन और बिस्तर लेकर पहुंचे हैं तथा मुख्यमंत्री आवास (श्यामला हिल्स) का घेराव करने की जिद पर अड़े हुए हैं।

​इस उग्र प्रदर्शन का मुख्य कारण ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल की सरकारी खरीदी में आ रही बाधाएं हैं। किसानों की मांग है कि राज्य में उत्पादित मूंग की शत-प्रतिशत फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी जाए। वर्तमान नियमों के तहत 'प्राइस सपोर्ट स्कीम' (PSS) के अंतर्गत खरीदी की सीमा कुल उत्पादन के मात्र 25 प्रतिशत तक सीमित कर दी गई है, जिसके कारण किसानों को अपनी बाकी फसल बाजार में औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा, खाद वितरण में आ रही तकनीकी दिक्कतों और 'ई-टोकन' व्यवस्था को समाप्त करने की भी पुरजोर मांग की जा रही है।

​प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठकों के बेनतीजा रहने के बाद आंदोलन ने और आक्रामक रूप ले लिया। हालांकि, राज्य सरकार ने स्थिति को संभालते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर मूंग खरीदी का लक्ष्य 4.54 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 8.06 लाख मीट्रिक टन करने का आग्रह किया है। इसके बावजूद, किसान लिखित और ठोस आश्वासन मिलने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। होशंगाबाद रोड और सावरकर सेतु के पास डेरा डाले किसानों के इस प्रदर्शन के चलते राजधानी में यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के तहत भारी पुलिस बल और आरएएफ की तैनाती की गई है, वहीं एहतियातन कई इलाकों के स्कूलों को भी बंद रखा गया है।


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