पंजाब पुलिस के इतिहास में खाकी को दागदार करने वाला एक बेहद संगीन और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। होशियारपुर जिले के टांडा उड़मुड़ थाना के पूर्व प्रभारी इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह नागरा को पुलिस ने सलाखों के पीछे भेज दिया है। यह गिरफ्तारी कोई सामान्य आपराधिक घटना नहीं है बल्कि इसके तार सात समंदर पार अमेरिका की सबसे प्रतिष्ठित जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी FBI से जुड़े हुए हैं। इस पूरे प्रकरण ने पंजाब में पुलिस प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय अपराधियों के बीच के खतरनाक गठजोड़ को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। इंस्पेक्टर नागरा पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए न केवल खाकी की मर्यादा को तार-तार किया बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को भी नुकसान पहुंचाया। इस मामले की गूंज अब दिल्ली से लेकर वाशिंगटन तक सुनाई दे रही है क्योंकि इसमें एक सीधे सादे अप्रवासी भारतीय परिवार को निशाना बनाने की साजिश रची गई थी।

FBI के ऑपरेशन हार्ड बॉल ने खोला राज

​इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब अमेरिकी न्याय विभाग और FBI ने मिलकर 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' नाम से एक बेहद गोपनीय और बड़ा अभियान चलाया। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य अमेरिका में रह रहे भारतीय मूल के नागरिकों को निशाना बनाने वाले जबरन वसूली रैकेट का पर्दाफाश करना था। जांच के दौरान अमेरिकी एजेंसियों के हाथ कुछ ऐसे इनपुट्स और डिजिटल सबूत लगे जिन्होंने सीधे तौर पर पंजाब के इस सिटिंग SHO की तरफ इशारा किया। जांच में यह बेहद सनसनीखेज खुलासा हुआ कि इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह नागरा जेल में बंद खूंखार गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के नेटवर्क के साथ सीधे संपर्क में थे। गैंगस्टर के गुर्गे अमेरिका में बैठे अपने साथियों के जरिए वहां के संपन्न व्यापारियों और परिवारों की सूची तैयार करते थे और फिर पंजाब में बैठा यह पुलिस अधिकारी कानून का खौफ दिखाकर उनसे मोटी रकम वसूलने की बिसात बिछाता था।

झूठे मर्डर केस में फंसाने की धमकी देकर मांगी करोड़ों की रंगदारी


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​इस अंतरराष्ट्रीय साजिश का शिकार लॉस एंजेलिस में रहने वाला एक सम्मानित भारतीय परिवार बना। इंस्पेक्टर नागरा ने इस परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और उन्हें आर्थिक रूप से लूटने की पूरी योजना बना ली थी। उन्होंने पीड़ित परिवार को यह धमकी दी कि पंजाब में दर्ज एक मर्डर केस में उनका नाम शामिल कर दिया जाएगा जिससे उनका भारत आना-जाना हमेशा के लिए बंद हो जाएगा और उनकी संपत्ति भी कुर्क कर ली जाएगी। इस झूठे मुकदमे से नाम बाहर रखने और कानूनी कार्रवाई से बचाने के एवज में आरोपी SHO ने चार लाख अमेरिकी डॉलर यानी लगभग पौने चार करोड़ रुपये की भारी-भरकम रंगदारी की मांग की थी। डरे हुए परिवार ने जब इसकी शिकायत अमेरिकी अधिकारियों से की तो उन्होंने भारत सरकार और पंजाब पुलिस के उच्च अधिकारियों से संपर्क साधा। शुरुआती आंतरिक जांच में ही यह साफ हो गया कि इंस्पेक्टर नागरा ने इस परिवार पर दबाव बनाने के लिए अवैध तरीके से पैसे की लेन-देन भी की थी जिसमें पुलिस को करीब सोलह लाख रुपये की शुरुआती अवैध वसूली के पुख्ता डिजिटल और दस्तावेजी सबूत मिल चुके हैं।

कानूनी शिकंजा में इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह नागरा

​जैसे ही इस अंतरराष्ट्रीय जबरन वसूली रैकेट में इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह नागरा की संलिप्तता के अकाट्य प्रमाण पंजाब पुलिस के आला अधिकारियों के पास पहुंचे, वैसे ही विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की गई। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर सबसे पहले इंस्पेक्टर नागरा को टांडा थाना के SHO पद से हटाकर तुरंत प्रभाव से लाइन हाजिर किया गया ताकि वह अपने पद का फायदा उठाकर जांच को प्रभावित न कर सकें। इसके तुरंत बाद पंजाब पुलिस की विशेष विंग ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून की विभिन्न सख्त धाराओं और जबरन वसूली के तहत मामला दर्ज करते हुए उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है और नागरा के मोबाइल फोन और बैंक खातों की गहनता से जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने अब तक इस नेटवर्क के जरिए और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।

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