बदलते सामाजिक परिवेश में मानवीय जरूरतें और रिश्तों के स्वरूप भी तेजी से बदल रहे हैं। आज का इंसान तकनीक के माध्यम से नएपन की तलाश में है, जिसका सीधा असर उसकी निजी और यौन जीवन पर पड़ रहा है। समलैंगिक रिश्तों के प्रति बढ़ती स्वीकार्यता और डेटिंग ऐप्स के चलन ने जहां एक ओर लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी दी है, वहीं दूसरी ओर अपराधियों के लिए ठगी का एक नया और असुरक्षित मैदान भी तैयार कर दिया है। चूंकि भारतीय समाज में आज भी समलैंगिकता को पूरी तरह से खुले मन से स्वीकार नहीं किया गया है, इसी सामाजिक संकोच और लोक-लज्जा का फायदा उठाकर जालसाज अब 'हनीट्रैप' और जबरन वसूली का धंधा चला रहे हैं।
आगरा में किडनैपिंग का ड्रामा और पुलिस की मुस्तैदी
ताजा मामला ताजनगरी आगरा का है, जहां मुंबई के एक प्रतिष्ठित साड़ी व्यापारी ने अपनी समलैंगिक पहचान छिपाने के लिए सनसनीखेज साजिश रची। व्यापारी सतीश अग्रवाल ने पुलिस को सूचना दी कि उनका कार सवार बदमाशों ने अपहरण कर लिया और मारपीट कर लाखों रुपये वसूल लिए। डीसीपी सिटी अली अब्बास के नेतृत्व में जब पुलिस ने जांच शुरू की, तो मामला पूरी तरह से फिल्मी निकला। पुलिस की सक्रियता और सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल ने महज 180 मिनट के भीतर उस झूठ की परतें उधेड़ दीं, जिसे व्यापारी ने बड़ी चालाकी से बुना था।
एप के जरिए दोस्ती और फिर ब्लैकमेलिंग का जाल
पुलिसिया जांच में यह कड़वा सच सामने आया कि व्यापारी सतीश अग्रवाल एक डेटिंग ऐप के माध्यम से एक युवक के संपर्क में आए थे। प्यार और मुलाकातों का सिलसिला जब परवान चढ़ा, तो मिलने की योजना बनी। मंगलवार को आगरा पहुंचने पर जब वह अपने पार्टनर से मिलने गए, तो वहां पहले से ही आरोपियों का गिरोह जाल बिछाकर बैठा था। कार में बैठते ही व्यापारी को धमकाया गया और उनकी निजी पसंद का फायदा उठाकर उन्हें ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया गया। आरोपियों ने व्यापारी के डर को हथियार बनाकर उनके खाते से 1.20 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए और उन्हें सादाबाद के पास छोड़कर फरार हो गए।
सामाजिक लोक-लज्जा बनाम कानून की हकीकत
व्यापारी ने अपनी इज्जत बचाने के लिए पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और अपहरण की मनगढ़ंत कहानी सुनाई। उन्होंने दिल्ली के एक कारोबारी का नाम भी इस साजिश में घसीटा ताकि मामला पेशेवर रंजिश जैसा लगे। हालांकि, पुलिस की तकनीकी जांच ने यह स्पष्ट कर दिया कि अपहरण की कोई घटना हुई ही नहीं थी, बल्कि यह सब उस डर का नतीजा था जो व्यापारी को समाज में अपनी छवि खराब होने के कारण सता रहा था। फिलहाल पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन यह घटना एक बड़े खतरे की ओर इशारा करती है कि किस तरह डिजिटल दुनिया की गोपनीयता अब अपराध का नया अड्डा बन गई है।
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