हापुड़ जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने रिश्तों की गरिमा और भरोसे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां समाज में बेटियों को पढ़ाने-लिखाने की वकालत की जाती है, वहीं हापुड़ के गुलशन की कहानी सुनकर लोग दंग हैं। गुलशन का आरोप है कि जिस पत्नी को उसने अपने खून-पसीने की कमाई से पढ़ाकर उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक (दारोगा) के पद तक पहुंचाया, उसी पत्नी ने वर्दी पहनते ही ससुराल के छह सदस्यों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और मारपीट जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया। पति ने हापुड़ के पुलिस अधीक्षक कुंवर ज्ञानंजय सिंह के सामने पेश होकर न्याय की गुहार लगाई है और अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि उसे कभी अंदाजा नहीं था कि उसकी मेहनत का फल उसे थाने के चक्कर काटकर भुगतना पड़ेगा।

प्रेम विवाह से शुरू हुआ सफर और कोर्ट की दहलीज तक पहुंची कहानी

इस विवाद की जड़ें साल 2016 से जुड़ी हैं, जब गुलशन और पायल रानी के बीच प्रेम संबंध शुरू हुए थे। दोनों साथ में पढ़ाई करते थे और एक-दूसरे के भविष्य के सपने बुनते थे। गुलशन के अनुसार, साल 2021 में उन्होंने कोर्ट मैरिज की और बाद में 2022 में सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ शादी के बंधन में बंधे। गुलशन का दावा है कि पायल की सफलता के पीछे उसका और उसके परिवार का पूरा सहयोग रहा है। उसने न केवल पायल को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया बल्कि आर्थिक रूप से भी हर कदम पर साथ दिया। मगर आरोप है कि जैसे ही पायल बरेली में दारोगा के पद पर तैनात हुई, उसके व्यवहार में बदलाव आने लगा। पति का कहना है कि अब वह अपने ससुराल वालों से पीछा छुड़ाना चाहती है और इसी साजिश के तहत उसने झूठे आरोप लगाकर पूरे परिवार को फंसाने की कोशिश की है।

महिला दारोगा के संगीन आरोप और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल

दूसरी ओर, बरेली में तैनात महिला सब इंस्पेक्टर पायल रानी ने जो आरोप लगाए हैं, वे बेहद डराने वाले हैं। पायल का कहना है कि शादी के बाद से ही उसे 10 लाख रुपये नकद और एक कार के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। शिकायत में तेजाब से हमले की धमकी और मारपीट जैसे दावों ने मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है। 13 नवंबर 2025 को दर्ज कराई गई इस एफआईआर के बाद से गुलशन का परिवार सदमे में है। हापुड़ के एसपी कुंवर ज्ञानंजय सिंह ने स्पष्ट किया है कि पुलिस दोनों पक्षों की बात सुन रही है और मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। यह मामला अब केवल दो लोगों के बीच का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून के दुरुपयोग और रिश्तों में आती दरार की एक ऐसी बानगी बन गया है जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है।


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