पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज का दिन काले अक्षरों में दर्ज हो गया है। राज्य की सत्ता पर लंबे समय से काबिज ममता बनर्जी की सरकार को राज्यपाल ने एक झटके में बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब राज्य में विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ चुके थे और जनता का फैसला सत्ताधारी दल के खिलाफ गया था। इसके बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोकतांत्रिक परंपराओं को ताक पर रखते हुए पद छोड़ने से साफ मना कर दिया था। राज्यपाल के पास इसके बाद कोई विकल्प नहीं बचा था क्योंकि विधानसभा का पांच साल का कार्यकाल आज समाप्त हो रहा था। बिना किसी नई सरकार के गठन और मुख्यमंत्री के अडियल रुख के बीच राज्यपाल ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए पूरी कैबिनेट को भंग करने का आदेश जारी कर दिया। यह निर्णय बंगाल की राजनीति में एक नए और अनिश्चित अध्याय की शुरुआत है।

लोकतंत्र बनाम सत्ता का मोह

ममता बनर्जी का यह दावा कि उन्हें साजिश के तहत हराया गया है और वह किसी भी सूरत में इस्तीफा नहीं देंगी, सीधे तौर पर संवैधानिक प्रक्रिया को चुनौती थी। राजभवन से बार-बार भेजे गए संदेशों के बाद भी जब मुख्यमंत्री ने पद रिक्त नहीं किया, तो इसे संवैधानिक मशीनरी की विफलता माना गया। बर्खास्तगी के इस आदेश ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। ममता बनर्जी के समर्थकों का तर्क है कि यह जनता के जनादेश का अपमान है, जबकि विपक्ष और संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद बिना बहुमत के पद पर बने रहना पूरी तरह असंवैधानिक है। इस सियासी खींचतान ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़कों पर बढ़ता तनाव और पुलिस की सक्रियता यह बताने के लिए काफी है कि बंगाल की जनता इस बदलाव को किस तरह देख रही है।

नई सरकार की आहट और अनिश्चित भविष्य


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सरकार की बर्खास्तगी के बाद अब सबकी नजरें विपक्षी खेमे पर टिकी हैं। भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल की बैठक बुलाने की तैयारी हो रही है ताकि वे अपने नेता का चुनाव कर सकें और सरकार बनाने का दावा पेश कर सकें। राज्य में राष्ट्रपति शासन की अटकलें भी तेज हो गई हैं, क्योंकि जब तक नया मुख्यमंत्री शपथ नहीं लेता, शासन की कमान सीधे तौर पर राज्यपाल के पास रहेगी। यह घटना न केवल बंगाल बल्कि देश की संघीय राजनीति के लिए एक बड़ा सबक है। क्या ममता बनर्जी इस फैसले को अदालत में चुनौती देंगी या फिर जनता के बीच जाकर नई लड़ाई का आगाज करेंगी, यह तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल, बंगाल की सत्ता की चाबी दीदी के हाथों से फिसलकर राजभवन की दहलीज तक पहुँच गई है और आने वाले कुछ घंटे राज्य के भविष्य के लिए निर्णायक साबित होने वाले हैं।
 

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