उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय यानी वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी में आयोजित सेमेस्टर परीक्षाओं के दौरान धांधली का एक गंभीर मामला सामने आया है। ऐसे समय में जब देश पहले से ही नीट परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर उबल रहा है, राज्य के इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में भी परीक्षा प्रणाली की साख पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। सेमेस्टर परीक्षा शुरू होने से कुछ ही देर पहले दो प्रमुख विषयों के प्रश्नपत्र लीक होकर ऑनलाइन माध्यमों पर सार्वजनिक हो गए।

​लीक हुए प्रश्नपत्रों में मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स तथा इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फील्ड थ्योरी जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। परीक्षा शुरू होने से पूर्व ही विभिन्न सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर प्रश्न तैरने लगे, जिसके बाद पूरे परिसर में हड़कंप मच गया। दिन-रात एक करके तैयारी करने वाले होनहार छात्रों में इस घटना से गहरा आक्रोश फैल गया, क्योंकि उनकी महीनों की निष्ठा और मेहनत पर इस गड़बड़ी ने पूरी तरह पानी फेर दिया।

​हजारों छात्र-छात्राओं पर पड़ा इस पेपर लीक का असर

​इस पूरे प्रकरण की जानकारी मिलते ही विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया और तत्काल प्रभाव से एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया। समिति की पड़ताल में प्रश्नपत्रों के परीक्षा से पहले सार्वजनिक होने की पुष्टि हो गई। जांच रिपोर्ट मिलते ही प्रशासन ने त्वरित फैसला लेते हुए दोनों विषयों की परीक्षाओं को पूरी तरह निरस्त कर दिया। अब इन रद्द की गई परीक्षाओं का दोबारा आयोजन अगस्त के तीसरे सप्ताह में किया जाना तय हुआ है।

​प्रशासन के इस सख्त कदम का सीधा प्रभाव विश्वविद्यालय से संबद्ध कई प्रसिद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजों के हजारों छात्र-छात्राओं पर पड़ा है। जिन संस्थानों के विद्यार्थियों को अब दोबारा से परीक्षा की कठिन प्रक्रिया से गुजरना होगा, उनमें बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड साइंसेज भीमताल, तुलाज इंस्टीट्यूट देहरादून, बिपिन त्रिपाठी कुमाऊं प्रौद्योगिकी संस्थान द्वाराहाट, रुड़की इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी तथा शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग देहरादून शामिल हैं। इनके अलावा जयराम भाई पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी देहरादून, माया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी देहरादून, बाबा फरीद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी देहरादून और वूमेंस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी देहरादून के छात्र भी पुनः परीक्षा देंगे। साथ ही टीएचडीसी इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोपावर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी टिहरी, नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग संस्थान पिथौरागढ़ और इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गोपेश्वर के छात्र-छात्राओं को भी दोबारा परीक्षा लिखनी पड़ेगी।


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​दोषी प्रोफेसर पर लगा सात साल का प्रतिबंध

​मामले की तह तक जाने पर फर्जीवाड़े के तार देहरादून के शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से जुड़े पाए गए। गहन छानबीन के दौरान कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ आशीष कुमार गुप्ता की संलिप्तता पूरी तरह साबित हो गई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस कृत्य को अक्षम्य अपराध मानते हुए संबंधित शिक्षक पर कड़ा फैसला लिया। आरोपी प्रोफेसर को आगामी सात वर्षों के लिए परीक्षा से जुड़ी सभी जिम्मेदारियों और गतिविधियों से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके साथ ही परीक्षा व्यवस्था में लापरवाही बरतने के लिए संबंधित संस्थान को भी कड़ी चेतावनी दी गई है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

​इस घटनाक्रम ने जहां एक तरफ प्रशासनिक चौकसी और त्वरित कार्रवाई का उदाहरण पेश किया है, वहीं दूसरी ओर निर्दोष विद्यार्थियों को बिना किसी गलती के मानसिक तनाव में डाल दिया है। छात्र संगठन अब परीक्षा प्रणाली में ऐसे ठोस और पारदर्शी सुधारों की मांग कर रहे हैं जिससे भविष्य में किसी भी दोषी की हिम्मत ऐसा दुस्साहस करने की न हो सके।

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