रुद्रपुर की राजनीति में लंबे समय से विधायक शिव अरोड़ा और महापौर विकास शर्मा के बीच चल रही वैचारिक और राजनीतिक दूरियां अब भाजपा संगठन के लिए चिंता का विषय बन गई थीं। दोनों कद्दावर नेताओं के बीच बढ़ती तनातनी का असर स्थानीय स्तर पर पार्टी के कामकाज और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ रहा था। इस स्थिति को भांपते हुए भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए दोनों नेताओं को देहरादून तलब किया। बंद कमरे में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने सीधे संवाद के जरिए दोनों नेताओं के पक्ष सुने और उनके बीच पनपे गिले-शिखवों को दूर करने का प्रयास किया।

​संगठन की ओर से इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी की एकजुटता को सुनिश्चित करना था। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया है कि व्यक्तिगत अहंकार या राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर संगठन के व्यापक हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बैठक में दोनों नेताओं को यह सख्त हिदायत दी गई कि भविष्य में किसी भी प्रकार का मतभेद सार्वजनिक मंचों पर सामने नहीं आना चाहिए। संगठन ने अनुशासन के दायरे में रहकर कार्यकर्ताओं के बीच सकारात्मक संदेश देने और आपसी समन्वय के साथ विकास कार्यों को गति देने पर जोर दिया है।

​यह पहला अवसर नहीं है जब दोनों नेताओं के बीच जारी तनातनी को समाप्त करने की कोशिश की गई है। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और सांसद अजय भट्ट ने भी अतीत में मध्यस्थता का प्रयास किया था, जिससे कुछ समय के लिए स्थितियां सामान्य होती नजर आईं, लेकिन बाद के घटनाक्रमों ने फिर से पुरानी दरारों को उभार दिया। इस बार प्रदेश नेतृत्व का सीधा हस्तक्षेप इस मायने में महत्वपूर्ण है कि आने वाले समय में पार्टी संगठन के निर्देशों का पालन न करने वालों पर कार्रवाई का दबाव भी हो सकता है।

​अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि देहरादून की इस बैठक का धरातल पर कितना असर देखने को मिलता है। क्या दोनों नेता संगठन की सीख को आत्मसात कर पुरानी कड़वाहट भूलकर साथ काम करेंगे या फिर आने वाले दिनों में रुद्रपुर की सियासत में फिर से नई तल्खियां देखने को मिलेंगी। फिलहाल, भाजपा संगठन ने अपने नेताओं को एक स्पष्ट लकीर खींचकर यह बता दिया है कि पार्टी की एकता ही जीत का एकमात्र रास्ता है।


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