उत्तराखंड की हसीन वादियों और हरी-भरी प्राकृतिक संपदा को सहेजने की दिशा में वर्तमान धामी सरकार ने एक बेहद संवेदनशील और जमीनी फैसला लिया है। ऋषिकेश क्षेत्र में प्रस्तावित देहरादून-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को लेकर पिछले कुछ समय से स्थानीय निवासियों, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों के बीच गहरी चिंता बनी हुई थी। इस अहम प्रोजेक्ट के दायरे में आने वाले सैकड़ों पेड़ों की कटाई का हर स्तर पर विरोध हो रहा था। जनता के इसी दर्द और उनकी चिंताओं को गंभीरता से समझते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कर दिया है कि देवभूमि में विकास की रफ्तार तो जरूरी है, लेकिन इसे प्रकृति को नुकसान पहुँचाकर या जनभावनाओं को आहत करके आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। सरकार के इस कदम से साफ है कि वह केवल फाइलों पर नहीं, बल्कि जनता के दिलों की बात सुनकर फैसले लेती है।
कानूनी औपचारिकताएं अपनी जगह, पर जनता का भरोसा सबसे ऊपर
यह बात सच है कि यह पूरी अवसंरचना परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई की देखरेख में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने स्वयं स्पष्ट किया कि इस हाईवे प्रोजेक्ट पर माननीय उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों और तमाम जरूरी वैधानिक व पर्यावरणीय स्वीकृतियां मिलने के बाद ही काम शुरू किया गया था। कानूनी और तकनीकी तौर पर सब कुछ दुरुस्त होने के बावजूद, सरकार ने केवल कागजी नियमों को ढाल नहीं बनाया। मुख्यमंत्री का मानना है कि लोकतंत्र की असली ताकत जनता का विश्वास होती है। अगर स्थानीय नागरिकों के मन में किसी योजना को लेकर कोई आशंका है, तो उसे दूर करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी बनती है।
मेज पर बैठकर बातचीत से निकाले रास्ता, अधिकारियों को सख्त निर्देश
इस संवेदनशील मोड़ पर मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव समेत संबंधित विभाग के आला अधिकारियों को दो टूक निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि परियोजना से जुड़े हर एक पक्ष—चाहे वे स्थानीय नागरिक हों, क्षेत्र के जनप्रतिनिधि हों या पर्यावरण विशेषज्ञ—सभी के साथ मिलकर दोबारा एक विस्तृत और खुली बातचीत की जाए। सरकार का इरादा एक ऐसा सकारात्मक माहौल तैयार करना है जहाँ हर कोई अपनी बात बेझिझक रख सके। जब तक सभी पक्षों के बीच एक ठोस सहमति और विश्वास का पुल नहीं बन जाता, तब तक प्रोजेक्ट के दायरे में आने वाले किसी भी पेड़ पर आरी नहीं चलेगी और कटान की प्रक्रिया पूरी तरह स्थगित रहेगी।
बेजुबान वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए तैयार हुआ खास प्लान
ऐसा नहीं है कि इस बड़े प्रोजेक्ट में केवल सड़कों को चौड़ा करने पर ही ध्यान दिया गया है, बल्कि जंगलों के असली बाशिंदों यानी वन्यजीवों की सुरक्षा का भी पूरा खाका खींचा गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस हाईवे के हिस्से में लगभग साढ़े तीन किलोमीटर लंबा एक विशेष हाथी अंडरपास बनाना प्रस्तावित है। इसके साथ ही छोटे वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए जगह-जगह विशेष कल्वर्ट की व्यवस्था भी की जा रही है। इन सुरक्षा उपायों का मुख्य उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकना और तेज रफ्तार गाड़ियों के कारण होने वाले सड़क हादसों में बेजुबान जानवरों की जान बचाना है।
हरियाली ही उत्तराखंड की असली सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान
अपने संदेश को गहराई देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने याद दिलाया कि उत्तराखंड की यह समृद्ध प्राकृतिक धरोहर सिर्फ देखने के लिए नहीं है, बल्कि यह इस पर्वतीय प्रदेश की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान की आत्मा है। सरकार के लिए राज्य की प्रकृति, यहाँ के लोगों की भावनाएँ और सूबे का आधुनिक विकास, ये तीनों ही चीजें एक बराबर महत्व रखती हैं। उन्होंने साफ किया कि उनकी सरकार हमेशा संवाद, आपसी सहमति और व्यापक जनहित के रास्तों पर ही आगे बढ़ेगी, ताकि हमारे पहाड़ों का इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत हो और देवभूमि की हरियाली भी अपनी पूरी खूबसूरती के साथ महफूज रहे।
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