​कंक्रीट के भारी-भरकम सीमेंट ब्लॉक, लोहे की मजबूत बैरिकेडिंग, घग्गर नदी के पुल पर सील जैसी सड़कें और चारों तरफ मुस्तैद सुरक्षा बल— पंजाब और हरियाणा का शंभू बॉर्डर एक बार फिर उसी खौफनाक और गहमागहमी भरे मंजर की गवाही दे रहा है जिसने 13 महीने लंबे ऐतिहासिक किसान आंदोलन की यादें ताजा कर दी हैं। पंजाब के किसानों ने एक बार फिर दिल्ली कूच का हुंकार भरा है, जिसके बाद हरियाणा प्रशासन ने सीमा पर अभेद्य किलेबंदी कर दी है। रास्ते इस कदर ब्लॉक किए गए हैं कि वहां से आम गाड़ियों का निकलना भी नामुमकिन सा हो गया है। बॉर्डर के इस नजारे को देखकर हर किसी के मन में बस यही एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या शंभू बॉर्डर पर एक बार फिर इतिहास दोहराया जाने वाला है और क्या हालात फिर से उसी मोड़ पर आकर खड़े हो गए हैं।

शम्भू बार्डर पर दिल्ली कूच के लिए एकत्र किसान

​इस पूरे घटनाक्रम पर पंजाब के प्रमुख किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने हरियाणा सरकार की इस सख्त घेराबंदी पर तीखा हमला बोला है। मंगलवार सुबह फतेहगढ़ साहिब में संवाददाताओं से बात करते हुए पंढेर ने आरोप लगाया कि किसानों की लोकतांत्रिक आवाज को कुचलने के लिए शंभू बॉर्डर को छावनी बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसान पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने दिल्ली जाना चाहते हैं, लेकिन सरकार सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात करके और रास्ते बंद करके डर का माहौल पैदा कर रही है। पंढेर ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि पंजाब में आकर बड़े-बड़े वादे करने वाली सरकार का असली चेहरा इस बैरिकेडिंग और धरपकड़ के रूप में सबके सामने आ गया है।

​किसानों के इस नए और अचानक शुरू हुए गतिरोध के केंद्र में 'देश बचाओ मोर्चा' के बैनर तले दिल्ली के किसान घाट पर प्रस्तावित एक दिवसीय किसान महापंचायत है। किसान नेताओं का साफ कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता देश के कृषि क्षेत्र और स्थानीय किसानों के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा है, इसलिए इसे बिना शर्त पूरी तरह रद्द किया जाना चाहिए। इस महापंचायत में शामिल होने के लिए पंजाब और हरियाणा के विभिन्न जिलों से किसानों ने बसों और अपनी गाड़ियों से दिल्ली जाने का खाका तैयार किया था। हालांकि, शंभू बॉर्डर पर रास्ता पूरी तरह बंद कर दिए जाने के कारण किसान सीमाओं पर ही एकत्र हो रहे हैं और स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।


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​आंदोलन के जोर पकड़ने की आहट मिलते ही पुलिस प्रशासन ने भी अपनी सख्ती कई गुना बढ़ा दी है। इसी कड़ी में भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी को दिल्ली जाते वक्त कुरुक्षेत्र के पास पुलिस ने हिरासत में ले लिया। संगठन के नेताओं ने आरोप लगाया है कि पूरे हरियाणा में जगह-जगह नाकेबंदी करके किसान कार्यकर्ताओं को पुलिस हिरासत में ले रही है ताकि वे दिल्ली न पहुंच सकें। शंभू सीमा पर सील किए गए रास्ते और प्रशासन की इस धरपकड़ के बीच अब तमाम किसान संगठन बॉर्डर पर ही आगे की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। बॉर्डर का यह तनाव इशारा कर रहा है कि आने वाले दिन देश की राजनीति और किसान आंदोलन के लिहाज से बेहद हलचल भरे हो सकते हैं।

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