देश के राष्ट्रीय राजमार्गों से गुजरने वाली गाड़ियों से वसूले जाने वाले टोल टैक्स में एक बेहद हैरान करने वाली धोखाधड़ी सामने आई है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने सात अलग-अलग राज्यों में फैले 120 करोड़ रुपये के बड़े टोल टैक्स घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए 42 टोल प्लाजा पर एक अवैध और फर्जी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया गया था। इस फर्जी सॉफ्टवेयर का काम गाड़ियों से कटने वाले भुगतान को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के खाते में भेजने के बजाय कर्मचारियों और ठेकेदारों के निजी खातों में डायवर्ट करना था।
मास्टरमाइंड आलोक सिंह गिरफ्तार
इस पूरे अंतरराज्यीय घोटाले का मुख्य सूत्रधार उत्तर प्रदेश का टोल ठेकेदार आलोक सिंह है। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर आलोक सिंह ने अपनी तकनीकी समझ का गलत फायदा उठाते हुए इस आपराधिक तंत्र का ताना-बाना बुना। उसने पहले टोल संचालन के ठेके हासिल किए और फिर कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर ली। इसके बाद टोल प्लाजा के सिस्टम में समानांतर फर्जी सॉफ्टवेयर अपलोड कर रोजाना लाखों रुपये की रकम एनएचएआई के खाते से गायब कर दी। ईडी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मास्टरमाइंड आलोक सिंह को गिरफ्तार कर लिया है।
जांच के घेरे में कई हाईवे कंपनियां
जांच एजेंसियों के अनुसार यह नेटवर्क सात राज्यों में अपनी जड़ें जमा चुका था। इस खेल में केवल कर्मचारी ही नहीं, बल्कि कई बड़ी टोल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी भी संदेह के घेरे में आ चुके हैं। शुरुआती जांच से संकेत मिलते हैं कि बिना उच्च अधिकारियों की मौन सहमति के इतने बड़े स्तर पर एनएचएआई के सिस्टम में सेंध लगाना संभव नहीं था। ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस लूट की रकम किन-किन बेनामी संपत्तियों और खातों में ट्रांसफर की गई है।
सैकड़ों दोषियों पर कसेगा कानूनी शिकंजा
इस मामले में आने वाले दिनों में सैकड़ों शातिर अपराधियों के जेल जाने की संभावना जताई जा रही है। घोटाले से जुड़े साक्ष्यों और डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट को खंगाला जा रहा है, जिससे यह साफ हो सके कि किस टोल प्लाजा से कितना फंड चोरी किया गया। केंद्रीय एजेंसियों के इस सख्त रुख से टोल संचालन से जुड़ी कंपनियों में हड़कंप मचा हुआ है और एनएचएआई भी अपने स्तर पर सभी 42 टोल प्लाजा के डिजिटल सिस्टम के ऑडिट में जुट गया है।
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