सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के युवाओं और छात्रों के हक में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने 20 से 25 जुलाई के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज की गई सभी प्राथमिकियों (एफ़आईआर) को पूरी तरह से रद्द करने का सख्त आदेश जारी किया है। अदालत के इस अप्रत्याशित और कड़े रुख के बाद देश भर में नीट पेपर लीक के विरोध में सड़कों पर उतरे युवाओं, छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने राहत की सांस ली है। इस कानूनी राहत मिलने के साथ ही सीजेपी की तरफ से भी बड़ा कदम उठाया गया और उन्होंने आगामी 5 सितंबर को राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाले अपने प्रस्तावित बड़े विरोध मार्च को आधिकारिक रूप से वापस लेने का फैसला किया।
अभिजीत दीपके का बयान
सर्वोच्च अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले के तत्काल बाद सीजेपी के संयोजक अभिजीत दीपके ने मीडिया के सामने आकर न्यायपालिका के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने अदालत के फैसले का पुरजोर स्वागत करते हुए कहा कि आज सही मायनों में लोकतंत्र और न्याय की जीत हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला केवल कानूनी मोर्चे पर मिली कोई साधारण जीत नहीं है, बल्कि यह उन अनगिनत पीड़ित परिवारों के साथ हुआ वास्तविक न्याय है जिन्होंने नीट परीक्षा में हुई धांधली और गड़बड़ी की वजह से मानसिक तनाव में आकर अपने बच्चों को हमेशा के लिए खो दिया। दीपके ने कहा कि सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज उठाने वाले हर एक व्यक्ति की मेहनत आज रंग लाई है।
पीड़ित परिवारों से भावुक माफी
मीडिया से विस्तृत बातचीत के दौरान सीजेपी संयोजक काफी भावुक नजर आए और उन्होंने नीट पेपर लीक विवाद के कारण अपनी जान गंवाने वाले छात्रों के माता-पिता से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी। उन्होंने बेहद दुखी मन से कहा कि व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र की भारी विफलताओं के कारण ईमानदारी और कड़ी मेहनत से पढ़ाई करने वाले मासूम बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि हम उन बच्चों को बचा नहीं सके, जिसकी कमी को दुनिया की कोई भी ताकत कभी पूरा नहीं कर सकती। दीपके ने बताया कि उन्होंने खुद कई ऐसे पीड़ित परिवारों से मुलाकात की है और उनके दर्द को करीब से महसूस किया है।
आंदोलन का व्यापक प्रभाव
नीट परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर से लेकर देश के कोने-कोने तक एक व्यापक और उग्र जनांदोलन देखने को मिला था। इस पूरे विवाद के दौरान छात्रों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर तंत्र की विफलताओं पर सवाल उठाए थे। सीजेपी का स्पष्ट मानना है कि जनता की इस सामूहिक एकजुटता ने ही इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर लाकर खड़ा किया। सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम आदेश से यह संदेश पूरी तरह साफ हो गया है कि लोकतांत्रिक ढांचे में अपने अधिकारों के लिए उठाई गई जनता की वाजिब आवाज को दमनकारी नीतियों या कानूनी मुकदमों के दम पर लंबे समय तक नहीं दबाया जा सकता।
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