पुरानी गाड़ियों के मालिकों की बढ़ती चिंताओं के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल विपणन कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने एक महत्वपूर्ण संकेत दिया है। कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संजय खन्ना ने जानकारी दी है कि पुरानी गाड़ियों की सुरक्षा और दक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से E10 पेट्रोल को एक अलग विकल्प के रूप में उपलब्ध कराने पर विचार चल रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वर्तमान में E20 पेट्रोल को वापस लेने या हटाने का कोई प्रस्ताव सरकार या कंपनियों के पास नहीं है।
ईंधन घटकों के अंतर
ईंधन मिश्रण की बात करें तो E10 पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल और 90 प्रतिशत पेट्रोल होता है, जबकि E20 पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़कर 20 प्रतिशत हो जाती है। जब से देश में E20 ईंधन की उपलब्धता बढ़ी है, तब से पुरानी गाड़ियों के मालिकों में माइलेज में कमी, इंजन पार्ट्स की क्षति और रखरखाव संबंधी लागत को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। इसी वजह से E10 ईंधन को समानांतर रूप से उपलब्ध कराने की मांग लगातार उठ रही है।
सप्लाई व्यवस्था की चुनौतियां
कंपनी का कहना है कि मौजूदा बुनियादी ढांचे का उपयोग करते हुए E10 की आपूर्ति संभव है। लॉजिस्टिक्स के स्तर पर भी कोई बड़ी तकनीकी बाधा नहीं दिखती, परंतु दोनों प्रकार के ग्रेड वाले पेट्रोल को एक साथ पंपों पर बेचना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने पूर्व में उल्लेख किया था कि देश भर के विशाल पेट्रोल पंप नेटवर्क पर अलग-अलग ग्रेड के ईंधन की आपूर्ति बनाए रखने से भंडारण और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का दृष्टिकोण
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने भी सुझाव दिया था कि पुराने वाहनों के उपयोगकर्ताओं की समस्या हल करने के लिए पंपों पर दोनों ग्रेड उपलब्ध कराए जाने चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा 1 अप्रैल से 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित ईंधन और RON 95 ऑक्टेन मानक लागू किए जाने के बाद से ही वाहन चालकों में इंजन की सेहत को लेकर संशय बना हुआ है। फिलहाल नीति स्पष्ट है कि E20 की व्यवस्था जारी रहेगी, लेकिन पुरानी गाड़ियों के लिए विकल्प तलाशने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
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