हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्र ग्यिरोंग में अचानक आई भीषण बाढ़ और मलबे के सैलाब ने व्यापक तबाही मचाई है। कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी कर भारत लौटने की प्रक्रिया में जुटे दर्जनों तीर्थयात्री इस आपदा की सीधी चपेट में आ गए। ग्यिरोंग स्थित मुख्य इमिग्रेशन सेंटर में विश्राम कर रहे 77 श्रद्धालुओं का बाढ़ के तेज बहाव के बाद से कोई अता-पता नहीं है। प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जानकारियों के अनुसार, पानी और कीचड़ के प्रचंड वेग ने पल भर में इमिग्रेशन इमारत और आसपास के पूरे इलाके को जलमग्न कर दिया।

सीमा पार फंसे सैंकड़ों श्रद्धालु

​नेपाल पर्यटन बोर्ड और स्थानीय आपदा प्रबंधन एजेंसियों द्वारा जारी शुरुआती आंकड़ों में सीमा पार यात्रा कर रहे सैकड़ों लोगों के संपर्क से बाहर होने की आशंका जताई गई है। यात्रा टूर ऑपरेटरों और सीमा अधिकारियों के समन्वय से मिली जानकारी के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र में कुल मिलाकर कई यात्री फंसे हुए हैं। हालांकि अलग-अलग जत्थों में शामिल अधिकांश तीर्थयात्री पूरी तरह सुरक्षित स्थानों पर पहुंच चुके हैं। फिलहाल तिब्बत और नेपाल के तटीय इलाकों में फंसे लोगों की पहचान और उनके परिजनों तक सही सूचना पहुंचाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है।

बाढ़ से निचले इलाकों में भारी तबाही


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​तिब्बत की ओर से भोटे कोशी नदी में आए अचानक उफान ने नेपाल के रसुवा जिले के निचले इलाकों में भारी तबाही फैलाई है। बाढ़ के कारण रसुवागाढ़ी और आसपास के कई सीमावर्ती गांव मुख्य मार्गों से कट गए हैं। बुनियादी ढांचे, सड़कों, पुलों और संचार नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे प्रभावित इलाकों में सूचनाओं का आदान-प्रदान बाधित हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने नदी के किनारे बसे गांवों को खाली कराने और लोगों को तुरंत ऊंचे तथा सुरक्षित स्थलों पर जाने के निर्देश दिए हैं।

पीएम मोदी ने घटना पर जताया दु:ख 

​आपदा की विभीषिका इतनी भयावह है कि राहत कार्य में जुटे और सीमा सुरक्षा में तैनात नेपाल पुलिस के 22 कर्मी भी अचानक आए सैलाब में बहकर लापता बताए जा रहे हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बलेन शाह से फोन पर बात कर इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त किया। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की तरफ से हर संभव मदद का भरोसा दिया और सीमा पार फंसे नागरिकों के साथ-साथ स्थानीय प्रभावितों के लिए संयुक्त राहत प्रयासों में पूर्ण सहयोग की बात कही।

लापता लोगों की तलाश में जुटा प्रशासन

​आपदा की भयावहता को देखते हुए नेपाल पुलिस, सशस्त्र सीमा बल और सेना की टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया है। दूसरी ओर, तिब्बत (चीन) के ग्यिरोंग पोर्ट इलाके में भी चीनी अधिकारियों द्वारा बड़े पैमाने पर खोज एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। दोनों देशों की टीमें दुर्गम मौसम, लगातार मलबे के बहाव और टूटे संपर्कों के बीच मलबे में दबे या बहे लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।

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