कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार के खिलाफ एक बार फिर बड़े आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। संगठन का आरोप है कि बीते 25 जुलाई को सरकार के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान जो सहमतियां बनी थीं, उन्हें अब तक धरातल पर नहीं उतारा गया है। युवाओं और छात्रों से किए गए वादे कागजों तक ही सीमित रह गए हैं, जिससे निराश और आक्रोशित होकर संगठन ने राजधानी दिल्ली में दोबारा सड़कों पर उतरने का निर्णय लिया है।

जंतर-मंतर नहीं, इंडिया गेट होगा नया ठिकाना

​इस बार के आंदोलन की रणनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पारंपरिक प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर के बजाय इस बार मार्च की शुरुआत ऐतिहासिक इंडिया गेट से करने की योजना बनाई गई है। प्रस्तावित मार्ग के अनुसार, यह एक अनुशासित और शांतिपूर्ण प्रदर्शन होगा, जो इंडिया गेट से रवाना होकर नई दिल्ली स्थित पुलिस मुख्यालय तक पहुंचेगा। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे अपनी जायज मांगों को लेकर अनुशासित तरीके से प्रशासन के सामने अपनी आवाज बुलंद करेंगे।

मुकदमों की वापसी और राहत पैकेज की मांग


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​आंदोलनकारियों की मुख्य मांगों में 25 जुलाई की सहमति के तहत युवाओं पर दर्ज सभी कानूनी मुकदमों की तत्काल निष्पक्ष वापसी शामिल है। इसके साथ ही, लंबे समय से प्रभावित छात्रों को उचित आर्थिक व मानसिक सहायता प्रदान करने के वादे को जल्द से जल्द पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। CJP का तर्क है कि सरकार की लगातार ढिलाई के कारण हजारों युवाओं का भविष्य अनिश्चितता के भंवर में फंसा हुआ है और अब उनके पास केवल लोकतांत्रिक विरोध का ही मार्ग शेष रह गया है।

व्यापक जनसमर्थन की उम्मीद

​5 सितंबर को होने वाले इस विशाल मार्च में न केवल राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता हिस्सा लेंगे, बल्कि उम्मीद है कि देश भर से आ रहे आम नागरिक भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। उम्मीद यह भी है कि इस प्रदर्शन में नीट परीक्षा से प्रभावित छात्रों के परिजन, युवा वर्ग और विभिन्न प्रतिष्ठित छात्र संगठनों के सदस्य बड़ी संख्या में शामिल होने दिल्ली पहुंचेंगे।  इस संभावित बड़े जमावड़े को ध्यान में रखते हुए, दिल्ली प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने भी राजधानी की कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपनी सतर्कता बढ़ा दी है।

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