खुद को 'सनातनी योद्धा' बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज के एक हालिया पॉडकास्ट ने देश के राजनीतिक गलियारों में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। पॉडकास्ट में जंतर-मंतर पर हुई हाथापाई और अपने बड़े राजनीतिक संपर्कों को लेकर किए गए दावों के बाद विपक्षी दलों ने सरकार और पुलिस-प्रशासन को कटघरे में खड़ा करना शुरू कर दिया है।

​आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि स्वतंत्र भारद्वाज ने कहा कि मोदी उनके बड़े भाई हैं। संजय सिंह का कहना था कि “पहले उन्हें यह महज बड़बोलापन लगा था…लेकिन जब उसे शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया तो सच्चाई खुलकर सामने आ गई…उन्होंने आरोप लगाया कि देश में नफ़रती भाषा, गुंडागर्दी और दलितों व मुसलमानों के साथ मारपीट जैसी घटनाओं को सत्ता के नेतृत्व और संरक्षण में बढ़ावा मिल रहा है।”

​दूसरी ओर विवाद में अपना नाम घसीटे जाने के बाद लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सख्त रुख अपनाया है। चिराग पासवान ने स्वतंत्र भारद्वाज द्वारा नाम का गलत इस्तेमाल किए जाने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि “पॉडकास्ट में हमला करने की बात स्वीकार करने वाले पर अगर सख्त कार्रवाई नहीं होती तो समाज में गलत संदेश जाएगा… उन्होंने यह भी साफ किया कि सार्वजनिक जीवन में किसी का फोटो खिंचाना व्यक्तिगत संबंध होने का प्रमाण नहीं है।”

​लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस घटनाक्रम को लेकर गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि भड़काऊ बयान देने वाले लोगों को राजनीतिक सह मिलती है, जिससे पुलिस तुरंत कठोर कार्रवाई करने से बचती है। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि मामले में निष्पक्ष रूप से कानूनी कार्रवाई की जा रही है।


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