नीट परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का गुस्सा सोमवार को दिल्ली की सड़कों पर ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा। पिछले एक महीने से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से धरना दे रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 'चलो संसद' मार्च का आह्वान किया था। इस प्रदर्शन के कारण देश की राजधानी में सुबह से लेकर देर शाम तक अभूतपूर्व उथल-पुथल देखने को मिली। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए प्रशासन ने जो कदम उठाए, उससे आम जनता को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन छात्रों और प्रदर्शनकारियों का हौसला डिगा नहीं।

  • ​सुबह के वक्त जैसे ही प्रदर्शन की शुरुआत हुई, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने एहतियात के तौर पर राजीव चौक, पटेल चौक और जनपथ समेत पांच प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के दरवाजे आम यात्रियों के लिए बंद कर दिए। इस अप्रत्याशित कदम की वजह से दफ्तर जाने वाले कामकाजी लोगों और विश्वविद्यालय जाने वाले छात्रों को भारी असुविधा हुई। मेट्रो स्टेशन बंद होने के बावजूद आंदोलनकारियों का जोश कम नहीं हुआ और हजारों की संख्या में छात्र तथा कार्यकर्ता मंडी हाउस से जंतर-मंतर की तरफ पैदल ही मार्च करने लगे। पूरा इलाका 'धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो' और 'छात्रों को न्याय दो' के नारों से गूंज उठा।
  • ​सुबह दस बजे से साढ़े ग्यारह बजे के बीच जंतर-मंतर पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने जैसे ही संसद भवन की तरफ बढ़ने के लिए बैरिकेड्स पार करने की कोशिश की, वहां पहले से मुस्तैद भारी पुलिस बल ने उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग शुरू कर दिया। पटेल चौक और जंतर-मंतर के मुहाने पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए हल्के लाठीचार्ज का सहारा लिया। इस शुरुआती झड़प के बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया, जिसे देखते हुए केंद्र सरकार ने तुरंत मध्यस्थता की पहल की। दोपहर होते-होते सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से बातचीत करने के लिए रवाना हुआ। 
  • जब बाहर सड़कों पर संग्राम चल रहा था, ठीक उसी समय संसद के भीतर भी इस आंदोलन की तपिश महसूस की जा रही थी। मानसून सत्र के पहले ही दिन विपक्षी दलों ने नीट पेपर लीक और जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के मुद्दे को दोनों सदनों में बेहद आक्रामक तरीके से उठाया। विपक्ष के भारी हंगामे, नारेबाजी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग के चलते संसद की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा। सरकार और विपक्ष के बीच इस टकराव ने साफ कर दिया कि यह मुद्दा केवल सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सबसे बड़ी पंचायत के केंद्र में आ चुका है।
  • ​दोपहर तीन बजे से चार बजे के बीच रायसीना रोड जंग के मैदान में तब्दील हो गई। संसद मार्ग से आगे बढ़ रहे आक्रोशित छात्रों को पुलिस ने संसद भवन से महज दो सौ मीटर पहले रोक दिया। जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ने का प्रयास किया, तो पुलिस ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया। इस झड़प में कई छात्र गंभीर रूप से चोटिल हो गए और सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों में भर दिया गया। स्थिति पर काबू पाने के लिए प्रशासन को मध्य दिल्ली के कुछ संवेदनशील हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को भी अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।
  • ​शाम चार बजे केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा के साथ सीजेपी प्रतिनिधिमंडल की बैठक संपन्न हुई, जिसमें संगठन ने अपनी प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखीं। लिखित ज्ञापन में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा मांगा गया, साथ ही नीट पेपर लीक के तनाव के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांkग की गई। इसके अलावा हिरासत में लिए गए सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिना शर्त रिहाई की मांग पर भी जोर दिया गया।
  • ​शाम सात बजे इस पूरे घटनाक्रम में एक नया मोड़ आया जब सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अस्पताल के बिस्तर से एक लिखित संदेश जारी किया। उन्होंने युवाओं पर हुई पुलिसिया बर्बरता की कड़े शब्दों में निंदा की और एलान किया कि वे अपना अनशन तब तक जारी रखेंगे, जब तक छात्र नेताओं को सीधे सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिल जाती। देर शाम सीजेपी प्रवक्ताओं ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि हालांकि सरकार ने मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है, लेकिन जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन और तेज गति से जारी रहेगा।

    शाम सात बजे के बाद से लेकर अब तक (रात 10:30 बजे तक) दिल्ली के जंतर-मंतर और आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम में बहुत बड़े अपडेट्स सामने आए हैं। इस समय की सबसे ताजा स्थिति नीचे दी गई है:

    • प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर फिर से कब्जा किया: सबसे बड़ा अपडेट यह है कि दिल्ली पुलिस द्वारा दोपहर में जंतर-मंतर पर की गई तोड़फोड़ और धरने के मंच को हटाए जाने के कुछ ही घंटों बाद, रात को CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके के नेतृत्व में हजारों प्रदर्शनकारी दोबारा जंतर-मंतर पहुंच गए हैं। छात्रों ने पुलिस द्वारा हटाए गए टेंट, गद्दे और कारपेट को दोबारा बिछाकर विरोध स्थल पर अपना नियंत्रण वापस ले लिया है और वहां रातभर का जागरण (Night Vigil) शुरू कर दिया है।
    • सरकार के रुख पर CJP का बयान: जे.पी. नड्डा के साथ हुई बैठक को लेकर CJP के प्रवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि सरकार ने मांगों को "उचित स्तर" पर उठाने का मौखिक आश्वासन जरूर दिया है, लेकिन लिखित में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इसीलिए संगठन ने एलान किया है कि वे सरकार के केवल वादों पर भरोसा करके पीछे नहीं हटेंगे और धरना पूरी ताकत से जारी रहेगा।
    • सोनम वांगचुक का अनशन अस्पताल में जारी: सफदरजंग अस्पताल से मिल रही खबरों के अनुसार, सोनम वांगचुक ने डॉक्टरों की सलाह के बावजूद रात में भी कुछ भी खाने से इनकार कर दिया है। उनका अनशन जारी है और अस्पताल के बाहर भी CJP के कार्यकर्ता एकजुट होने लगे हैं।
    • हिरासत में लिए गए छात्रों की रिहाई की मांग: रायसीना रोड और जंतर-मंतर से दोपहर में जिन सैकड़ों छात्र नेताओं और प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था, उन्हें देर रात तक पूरी तरह नहीं छोड़ा गया है। जंतर-मंतर पर डटे छात्र अब उनकी तत्काल रिहाई की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे हैं।
    • सुरक्षा बल अभी भी मुस्तैद: जंतर-मंतर को प्रदर्शनकारियों द्वारा दोबारा घेरे जाने के बाद दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की अतिरिक्त कंपनियों को रात के समय भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि कानून-व्यवस्था नियंत्रण में रहे।

    संक्षेप में कहें तो, शाम की पुलिस कार्रवाई के बाद लगा था कि आंदोलन थम जाएगा, लेकिन रात होते-होते छात्रों ने जंतर-मंतर पर वापसी करके यह साफ कर दिया है कि यह लड़ाई लंबी चलने वाली है


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