नीट पेपर लीक मामले ने पूरे देश की राजनीति और छात्रों के भविष्य को केंद्र में ला खड़ा किया है। इस आंदोलन की आग में तप रहे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके अपनी मांगों पर अडिग हैं और पिछले तीन दिनों से आमरण अनशन पर हैं। इस आंदोलन को कुचलने के लिए प्रशासन द्वारा अपनाए जा रहे हथकंडों को लेकर अब एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया के माध्यम से दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए एक सनसनीखेज दावा किया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल के पास पत्थरों से भरा एक ट्रक और क्षतिग्रस्त वैन खड़ी की गई है।
दीपके ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह सब शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम करने की एक पूर्व नियोजित साजिश है। उनका मानना है कि आने वाले समय में मुख्यधारा की मीडिया इसे प्रदर्शनकारियों की करतूत बताकर प्रचारित करेगी, ताकि सरकार और पुलिस प्रशासन का चेहरा बचाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीजेपी के कार्यकर्ता पूरी तरह से अहिंसक तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से की जा रही यह तैयारी किसी बड़ी अनहोनी का संकेत देती है। उनका आरोप है कि पुलिस अधिकारी कुछ असामाजिक तत्वों को प्रदर्शन में शामिल होने की छूट दे सकते हैं ताकि बाद में सारी जिम्मेदारी शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर मढ़ी जा सके।
जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल की तैनाती और इन संदिग्ध वाहनों की मौजूदगी ने पूरे माहौल में तनाव पैदा कर दिया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ यह सत्याग्रह अब केवल नीतिगत बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई बन चुका है। अभिजीत दीपके के ये आरोप देश के कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले महकमे की निष्पक्षता पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हैं। प्रशासन का दावा है कि ये इंतजाम सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर ऐसी व्यवस्था केवल आंदोलन को कुचलने और प्रदर्शनकारियों को फंसाने के लिए की गई है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस पर क्या सफाई देता है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन का यह रास्ता किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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