प्रस्तावित भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड डील के विरोध में देश बचाओ मोर्चा के बैनर तले आयोजित दिल्ली महापंचायत ने राजधानी की सीमाओं पर एक बार फिर तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी। दिल्ली के ऐतिहासिक किसान घाट पर इकट्ठा होने का आह्वान लेकर निकले हजारों किसानों को रोकने के लिए दिल्ली और हरियाणा के शंभू, खनौरी तथा कुंडली बॉर्डर्स को सुबह से ही छावनी में तब्दील कर दिया गया था। प्रशासन द्वारा जगह-जगह लगाए गए कंक्रीट के बड़े ब्लॉक्स, कटीले तारों और भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने माहौल को बेहद संवेदनशील बना दिया था। सुरक्षा घेरा तोड़कर दिल्ली में दाखिल होने की कोशिशों के बीच राजधानी के सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आम जनता को घंटों भीषण ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ा।

किसानों ने दी ​10 दिनों की मोहलत

​बढ़ते जनआक्रोश और यातायात की बदहाली को देखते हुए हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभाला। प्रशासन और किसान नेताओं के बीच आयोजित आपातकालीन वार्ता में स्थिति को संभालने पर सहमति बनी। सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया कि प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए सभी कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा कर दिया जाएगा। इसके साथ ही, किसानों की प्रमुख मांगों को केंद्र सरकार के पटल पर रखने के उद्देश्य से आगामी दस दिनों के भीतर केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक कराने का लिखित आश्वासन दिया गया। इस ठोस पहल के बाद किसान संगठनों ने अपनी भावी रणनीति पर विचार करते हुए अपने दिल्ली कूच को फिलहाल टालने का फैसला किया।

​किसान संगठनों की स्पष्ट चेतावनी

​आंदोलन स्थगित होने के बाद भारतीय किसान यूनियन और अन्य प्रमुख किसान नेताओं ने साफ लहजे में कहा कि यह विराम केवल एक अल्पकालिक स्थगन है, आंदोलन का अंत नहीं। किसान नेताओं का तर्क है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित यह व्यापार समझौता देश के छोटे किसानों और डेयरी उद्योग के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। वे किसी भी शर्त पर अपने कृषि बाजार को विदेशी कंपनियों के हवाले नहीं होने देंगे। किसान संगठनों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि तय सीमा के भीतर केंद्रीय मंत्री के साथ होने वाली वार्ता में कृषि हितों की रक्षा का कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो पूरे देश में इससे भी बड़ा और व्यापक आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

​बॉर्डर्स से हटने लगे बैरिकेड्स

​वार्ता में बनी सहमति के बाद सीमाओं पर जमा किसान अपने वाहनों के साथ पंजाब और हरियाणा के विभिन्न इलाकों की ओर वापस लौटने लगे हैं। पुलिस प्रशासन ने भी मुस्तैदी दिखाते हुए सड़कों पर रखे गए भारी कंक्रीट बैरिकेड्स और लोहे की झाड़ियों को हटाना शुरू कर दिया है। कुंडली-सिंघु बॉर्डर और बहादुरगढ़ बाईपास सहित आसपास के इलाकों में धीरे-धीरे वाहनों की आवाजाही सुचारू होने लगी है। कई घंटों तक ठप रहने के बाद दिल्ली-एनसीआर का जनजीवन एक बार फिर सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहा है, हालांकि किसान और सरकार दोनों की नजरें अब आगामी केंद्रीय स्तर की वार्ता पर टिकी हुई हैं।


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