राजधानी दिल्ली में परीक्षाओं में धांधली और युवाओं की मांगों को लेकर जारी विवाद ने अब बड़े राजनीतिक संग्राम का रूप ले लिया है। जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र समूहों और युवा कार्यकर्ताओं पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने सीधा मोर्चा खोल दिया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में पार्टी के शीर्ष नेताओं और सांसदों ने संसद भवन से 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास की ओर विरोध मार्च निकाला। विपक्षी नेताओं का कहना था कि जब संसद के भीतर देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा की अनुमति नहीं दी गई, तो उन्हें प्रधानमंत्री के द्वार तक जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

डिटेन किये युवाओं से मिलते केजरीवाल
प्रदर्शन और मार्च से ठीक पहले राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे। वहां उन्होंने पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज में घायल हुए छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। अरविंद केजरीवाल ने अस्पताल के बाहर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अपने भविष्य की रक्षा के लिए आवाज उठा रहे निर्दोष छात्रों पर इस तरह बल प्रयोग करना पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली देने में विफल रही है और जब युवा सवाल पूछते हैं तो उन पर लाठियां बरसाई जाती हैं। विपक्ष के दोनों प्रमुख घटकों ने एक सुर में गृह मंत्री और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
विपक्ष के इस आक्रामक रुख को देखते हुए नई दिल्ली क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पीएम आवास जाने वाले तमाम प्रमुख मार्गों को कंक्रीट बैरिकेड्स और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के साथ पूरी तरह सील कर दिया गया था। इलाके में धारा 163 लागू कर दी गई ताकि भीड़ इकट्ठा न हो सके। जैसे ही प्रदर्शनकारी सांसद और कार्यकर्ता बैरिकेड्स के करीब पहुंचे, पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान तीखी धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, वरिष्ठ नेता के. सुरेश और कन्हैया कुमार सहित कई प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

राहुल गांधी को धरना स्थल से उठाकर ले जाती पुलिस
छात्र आंदोलन पर हुई इस पुलिस कार्रवाई ने विपक्ष को एक मंच पर ला खड़ा किया है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों ने ही स्पष्ट कर दिया है कि वे युवाओं की आवाज को दबने नहीं देंगे। विपक्षी दलों का साफ कहना है कि परीक्षा प्रणालियों में सुधार, पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून और छात्रों पर दर्ज मुकदमों की वापसी तक उनका यह संघर्ष जारी रहेगा। यदि सरकार ने अपनी नीतियों और रवैये में सुधार नहीं किया, तो आने वाले दिनों में संसद के आगामी सत्रों के साथ-साथ देशभर की सड़कों पर इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
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