छात्रों और युवाओं की मांगों को लेकर राजधानी दिल्ली की सड़कों पर शुरू हुआ राजनीतिक संग्राम अब और उग्र रूप धारण कर चुका है। जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण धरना दे रहे छात्र संगठनों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने सीधे प्रधानमंत्री आवास का रुख किया। संसद भवन से निकलकर 7, लोक कल्याण मार्ग की ओर बढ़ रहे कांग्रेस सांसदों और कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने चप्पे-चप्पे पर कड़े सुरक्षा प्रबंध किए थे। हालांकि, आक्रोशित नेताओं ने बैरिकेड्स पार कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई पूर्व मुख्यमंत्रियों, सांसदों और कई वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया। पुलिस गाड़ियों और बसों के जरिए प्रदर्शनकारियों को नजदीकी थानों में ले जाया गया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

​पुलिस और राहुल गांधी के बीच तीखी बहस

​प्रदर्शन के दौरान सबसे ज्यादा हलचल उस वक्त देखने को मिली जब लोक कल्याण मार्ग के पास सुरक्षा बलों ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को रोक दिया। इस दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और ऑन-ड्यूटी पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं और छात्रों की आवाज को दबाने के लिए तानाशाही रवैया अपना रही है। घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया और खबरों के बाजार में राहुल गांधी की गिरफ्तारी को लेकर अफवाहें फैलने लगीं। हालांकि, प्रशासनिक सूत्रों ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने पर केवल औपचारिक हिरासत की कार्रवाई की गई है, जो इस तरह के राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान एक सामान्य प्रक्रिया होती है। इस घटनाक्रम के बाद से ही कांग्रेस समर्थक सड़कों पर उतरकर सरकार विरोधी नारेबाजी कर रहे हैं।

मंदिर मार्ग थाने में हिरासत में बैठी प्रियंका गांधी

 


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आर-पार के मूड में विपक्ष

​इस पूरे विरोध प्रदर्शन की मुख्य जड़ देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और उसके विरोध में उतरे छात्रों पर हुआ पुलिस बल प्रयोग है। विपक्ष का कहना है कि जब देश का युवा अपने भविष्य और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहा है, तो सरकार बातचीत करने के बजाय उन पर लाठियां बरसा रही है। कांग्रेस के नेताओं का साफ तौर पर कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता और पुलिस कार्रवाई में घायल हुए छात्रों को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। पीएम आवास के बाहर हुए इस घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि विपक्ष अब इस मुद्दे को केवल संसद तक सीमित न रखकर सीधे जनता और सड़कों के बीच ले जाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

वीआईपी इलाकों में धारा 163 लागू

​पीएम आवास के आसपास हुए इस भारी हंगामे और नेताओं की हिरासत के बाद पूरी नई दिल्ली क्षेत्र में चौकसी बढ़ा दी गई है। संवेदनशील इलाकों में धारा 163 लागू कर दी गई है ताकि चार से अधिक लोग एक जगह जमा न हो सकें। लुटियंस दिल्ली को जोड़ने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल और पैरामिलिट्री जवानों को तैनात किया गया है। जगह-जगह लगाए गए कंक्रीट के बैरिकेड्स की वजह से मध्य दिल्ली के कई इलाकों में आम जनता को घंटों यातायात की समस्या से जूझना पड़ा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी और वीआईपी सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा, वहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनके नेताओं की रिहाई तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

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