नीट परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में उठा बवंडर अब पूरे देश में फैल चुका है। दिल्ली से शुरू हुई यह चिंगारी अब बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों को अपनी चपेट में ले चुकी है। हर तरफ छात्र और राजनीतिक संगठन सड़कों पर उतरकर अपना कड़ा विरोध दर्ज करा रहे हैं। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार हो रहे भ्रष्टाचार और शिक्षा के निजीकरण ने उनके भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है।

इस पूरे बवाल के केंद्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है, जिसकी मांग को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में उग्र प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी कड़ी में बुधवार को बिहार की राजधानी पटना की सड़कें अचानक जंग का मैदान बन गईं, जहां अपने हक की आवाज उठा रहे हजारों छात्रों का सीधा सामना पुलिस के डंडों और आंसू गैस से हुआ।

पटना की सड़कों पर पुलिस और छात्रों के बीच हिंसक टकराव


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पटना में हालात उस वक्त बेकाबू हो गए जब हजारों की संख्या में छात्र राजभवन की ओर मार्च कर रहे थे। छात्रों का यह विशाल हुजूम दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन पर हुई पुलिस कार्रवाई और पेपर लीक के खिलाफ एकजुट हुआ था। पुलिस ने शुरुआत में जेपी गोलंबर पर बैरिकेडिंग लगाकर इस भीड़ को रोकने का प्रयास किया और उन्हें वापस लौटने की चेतावनी दी। लेकिन आक्रोशित छात्रों का सैलाब रुकने वाला नहीं था। जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, पुलिस ने भारी बल प्रयोग शुरू कर दिया। छात्रों को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का अंधाधुंध इस्तेमाल किया गया और आंसू गैस के गोले दागे गए। जब स्थिति फिर भी नियंत्रण से बाहर रही, तो पुलिस ने बेरहमी से लाठियां भांजनी शुरू कर दीं। इस हिंसक कार्रवाई के बावजूद छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं थे और सड़क पर ही बैठकर सरकार विरोधी नारेबाजी करने लगे।

डाकबंगला चौराहे पर तनाव और सुरक्षा बलों की तैनाती

पुलिस की लाठीचार्ज और आंसू गैस भी छात्रों के हौसले को नहीं तोड़ पाई। कुछ ही देर बाद प्रदर्शनकारी दोबारा एकजुट हुए और पुलिस की तमाम बंदिशों को ध्वस्त करते हुए पटना के हृदय स्थल माने जाने वाले डाकबंगला चौराहे तक पहुंच गए। वहां भारी तादाद में पहुंचे छात्रों ने मोर्चा संभाल लिया, जिससे पूरे शहर का यातायात और जनजीवन बुरी तरह ठप हो गया।

पटना में तोड़ी भाजपा विधायक की गाड़ी

उग्र भीड़ का गुस्सा इस कदर भड़क चुका था कि वहां से गुजर रहे पुलिस अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। इसी दौरान आईजी की एस्कॉर्ट गाड़ी पर हमला किया गया, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। इतना ही नहीं, भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की गाड़ियों और वहां से गुजर रहे एक विधायक को भी छात्रों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा और उन्हें मौके से खदेड़ दिया गया। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तत्काल प्रभाव से सीआरपीएफ और बीएसएफ के जवानों को डाकबंगला चौराहे पर तैनात करना पड़ा।

अन्य राज्यों में भी गूंज रही विरोध की आवाज

बिहार के सीतामढ़ी में भी छात्रों ने शांतिनगर चौक से वीर कुंवर सिंह चौक तक मार्च निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। दूसरी तरफ, उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में भी राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। वाराणसी में प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस जबरन उठाकर ले गई, जबकि लखनऊ समेत कई अन्य शहरों में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पेपर लीक और दिल्ली में छात्रों के साथ हुई ज्यादती के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। इसी बीच, नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद दिल्ली में लगातार धरने पर बैठे हुए हैं।

देहरादून में प्रदर्शनकारियो को रोकती पुलिस

मध्य प्रदेश में भी इस मुद्दे की गूंज विधानसभा से लेकर सड़कों तक सुनाई दी, जहां कांग्रेस विधायक विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर सदन पहुंचे। छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उग्र प्रदर्शन करते हुए लोकभवन का घेराव किया। वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता भी कांग्रेस के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं, जिससे यह पूरा मुद्दा अब एक बड़े राजनीतिक घमासान में तब्दील हो चुका है।

पटना में भिड़े भाजपा-कांग्रेसी

पटना में स्थिति उस समय अत्यधिक तनावपूर्ण हो गई जब दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच चल रही तीखी नोकझोंक और नारेबाजी ने हिंसक रूप ले लिया। दोनों तरफ से जमकर लाठी-डंडे चले और हाथापाई हुई। एक ओर जहां कांग्रेस कार्यकर्ता नीट मामले को लेकर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए आक्रामक प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बीजेपी के कार्यकर्ता कांग्रेस के विरोध में जवाबी मोर्चा खोलकर सड़कों पर उतर आए हैं।

इस राजनीतिक झड़प ने पुलिस और प्रशासन के लिए एक दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ छात्रों का हुजूम बेकाबू हो रहा है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक दलों के बीच हो रही इस हिंसा ने कानून-व्यवस्था की स्थिति को और भी नाजुक बना दिया है। सुरक्षा बलों को अब छात्रों के साथ-साथ इन राजनीतिक कार्यकर्ताओं को भी नियंत्रित करने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है और कई जगहों पर अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई है। अहमदाबाद और जालंधर जैसे कई शहरों में भी लगातार विरोध की आग सुलग रही है, जो यह साफ दर्शाता है कि यह छात्र आंदोलन अब पूरे देश में फैल चुका है।

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