नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन अब पूरी तरह से आर-पार की लड़ाई में बदल गया है। केंद्र सरकार की ओर से माहौल को शांत करने की नीयत से भारतीय जनता पार्टी की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के जरिए दूसरी बार बातचीत का प्रस्ताव भेजा गया था। हालांकि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र संगठन सीजेपी ने इस न्योते को साफ तौर पर ठुकरा दिया है। छात्रों का कहना है कि सरकार संवाद का नाटक करके केवल समय बिताने और आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। दूसरी बार का यह वार्ता प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद जंतर-मंतर पर सरकार विरोधी नारेबाजी और तेज हो गई है तथा पूरे आंदोलन स्थल पर भारी प्रशासनिक चौकसी बढ़ा दी गई है।
20 जुलाई का धोखा व लाठीचार्ज बना वजह
सीजेपी द्वारा वार्ता प्रस्ताव ठुकराए जाने के पीछे बीस जुलाई का घटनाक्रम मुख्य वजह बना हुआ है। उस दिन भी जब हजारों की संख्या में छात्र संसद मार्च की तैयारी कर रहे थे, तब सरकार ने आनन-फानन में बातचीत का प्रस्ताव भेजा था। छात्रों ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए अपने प्रस्तावित संसद मार्च को तुरंत रोक दिया था और संगठन की तरफ से दो प्रतिनिधियों सौरव दास ओर आशुतोष रांका को बातचीत के लिए भेजा गया था। लेकिन प्रतिनिधियों के वहां पहुंचने के बाद उन्हें लगभग दो घंटे तक इंतजार कराया गया। काफी देर बाद जेपी नड्डा से मुलाकात तो हुई और प्रतिनिधियों ने अपनी मुख्य मांगों को लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन उस बातचीत का कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया।
सीजेपी की थी तीन प्रमुख मांगें
प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत के दौरान सरकार के सामने अपनी तीन मुख्य शर्तें प्रमुखता से रखीं। छात्रों ने नीट घोटाले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के तत्काल इस्तीफे, लद्दाख के प्रसिद्ध समाज सुधारक सोनम वांगचुक की अविलंब रिहाई और इस पूरी परीक्षा त्रासदी के कारण मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या करने वाले बेकसूर छात्र-छात्राओं के पीड़ित परिवारों के लिए उचित वित्तीय मुआवजे और न्याय की पुरजोर मांग की।
सरकारी खामोशी के बाद शुरू हुआ था संसद मार्च
ज्ञापन सौंपने के बाद छात्र संगठन काफी समय तक सरकार की ओर से किसी आधिकारिक या सकारात्मक रिस्पांस का इंतजार करता रहा। जब लंबे समय तक केंद्र सरकार की तरफ से कोई जवाब या ठोस कदम सामने नहीं आया, तो ठगे महसूस कर रहे छात्रों ने अपना रुका हुआ संसद मार्च दोबारा शुरू कर दिया। संसद की तरफ बढ़ते इस विशाल जनसैलाब को देखकर प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और मौके पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई। पुलिस और सुरक्षा बलों ने छात्रों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए और प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं पर बेरहमी से लाठीचार्ज कर दिया। इस लाठीचार्ज और धक्का-मुक्की में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिससे जंतर-मंतर पर डटे परीक्षार्थियों के भीतर भारी आक्रोश भर गया।
छात्र अब केवल ठोस फैसले की मांग पर अड़े
बीस जुलाई के उस दर्दनाक अनुभव के बाद अब छात्र संगठन किसी भी खोखले आश्वासन पर विश्वास करने को तैयार नहीं हैं। सीजेपी के प्रतिनिधियों का साफ कहना है कि पिछली बार बातचीत के नाम पर आंदोलन को रोकने की कोशिश की गई थी और बाद में छात्रों पर लाठियां बरसाई गईं। यही कारण है कि इस बार दूसरी बार आए वार्ता प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया गया है। जंतर-मंतर पर लगातार दिन-रात धरने पर बैठे छात्रों की मांग है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और नीट परीक्षा में हुए भ्रष्टाचार की पारदर्शी जांच की लिखित घोषणा नहीं होती, तब तक कोई भी प्रतिनिधिमंडल वार्ता की मेज पर नहीं जाएगा। जंतर-मंतर पर बना यह गतिरोध अब केंद्र सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बन चुका है।
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