देश के प्रमुख शिक्षा सुधारक और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर जारी अपने अनशन को खत्म करने के संदर्भ में केंद्र सरकार के सामने एक बेहद महत्वपूर्ण शर्त रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों पर किसी भी प्रकार की प्रतिशोध या दंडात्मक कानूनी कार्रवाई न करने का ठोस और स्पष्ट आश्वासन देती है, तभी वह अपना अनशन समाप्त करेंगे। इस तरह के औपचारिक आश्वासन के अभाव में, वे देश के युवाओं के हित में अपना अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखने के लिए पूरी तरह विवश होंगे।
हाल ही में बीस जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान पुलिस बल प्रयोग की घटनाओं का उल्लेख करते हुए वांगचुक ने सरकार का ध्यान युवाओं की भावना की ओर खींचा। उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी केवल एक निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रही है। उनका एकमात्र तथाकथित अपराध यह है कि उन्होंने अपने बेहतर भविष्य के लिए हिम्मत के साथ आवाज उठाई है। ऐसे में यदि सरकार इन निर्दोष युवाओं पर मुकदमों और पुलिस कार्रवाई का दबाव बनाती है, तो यह देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ होगा।
सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ जितेंद्र सिंह को संबोधित करते हुए एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने बीती रात अस्पताल में उनसे मुलाकात करने और अनशन खत्म करने की अपील के लिए दोनों मंत्रियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि बातचीत के दौरान मंत्रियों ने पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने और इस पूरे मामले पर संसद में सार्थक चर्चा कराने पर सकारात्मक विचार करने का भरोसा दिया है। इस चर्चा में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के पहलू को भी शामिल करने की बात कही गई है।
अपने पत्र में वांगचुक ने यह भी साझा किया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग पैंसठ सांसदों ने उन्हें पत्र भेजकर अनशन खत्म करने का अनुरोध किया है। कई सांसद व्यक्तिगत रूप से भी उनसे मिलने पहुंचे हैं। सांसदों ने उन्हें याद दिलाया कि देश सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान की अभी और आवश्यकता है। इस पर वांगचुक ने बेहद भावुक होकर कहा कि वह निश्चित रूप से जीवित रहना चाहते हैं, अपने छात्रों के बीच लौटना चाहते हैं और शिक्षा के उसी काम में जुटना चाहते हैं जिसने उनके जीवन को गढ़ा है। हालांकि, वे ऐसा उन युवाओं की कीमत पर कदापि नहीं कर सकते जिनके न्याय के लिए यह पूरा आंदोलन शुरू हुआ था।
लोकतंत्र की मूल भावना को रेखांकित करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश का भविष्य केवल इस बात से तय नहीं होता कि वह अपनी नीतियों से सहमत होने वालों के साथ कैसा व्यवहार करता है, बल्कि इससे तय होता है कि जब उसके युवा नागरिक साहस, उम्मीद और दृढ़ विश्वास के साथ आवाज उठाते हैं, तब उनके साथ कैसा बर्ताव किया जाता है। फिलहाल पूरे देश की निगाहें सरकार के अगले रुख पर टिकी हैं।
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