राजधानी दिल्ली के साउथ कैंपस थाना क्षेत्र स्थित सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर को एक दर्दनाक हादसा सामने आया। नानकपुरा गुरुद्वारे के पास लगभग 80 गज के प्लॉट में बनी एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस इमारत में पेइंग गेस्ट (पीजी) हॉस्टल संचालित किया जा रहा था और इसके बेसमेंट में कुछ निर्माण कार्य भी चल रहा था। रविवार दोपहर करीब डेढ़ बजे जब यह हादसा हुआ, तब तेज आवाज के साथ पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो गई, जिससे आसपास के पूरे रिहायशी और व्यापारिक इलाके में अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
राहत कार्य में जुटी टीमें
घटना की जानकारी मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस, स्थानीय पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें बचाव कार्य के लिए त्वरित गति से मौके पर पहुंच गईं। दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि एनडीआरएफ, डीडीएमए, एमसीडी, कैट्स एंबुलेंस और सिविल डिफेंस की टीमें धरातल पर पूरी तरह से मुस्तैद हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों को आपस में बेहतर समन्वय बनाकर बचाव कार्य में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। हादसे के तुरंत बाद एहतियात के तौर पर आसपास की इमारतों को भी खाली करा लिया गया है ताकि कोई अन्य अनहोनी न हो।
अस्पताल में भर्ती घायल
ताजा जानकारी के मुताबिक, मलबे से निकाले गए तीन घायलों को तुरंत इलाज के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है और उनकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है। घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि राहत तथा बचाव दल जमीन पर पूरी मुस्तैदी के साथ सहायता पहुंचाने में जुटे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण ही प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। दूसरी ओर, स्थानीय निवासियों और मीडिया रिपोर्टों में नगर निगम द्वारा पूर्व में दिए गए नोटिस के बावजूद काम जारी रहने को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
चार साल में दूसरा हादसा
स्थानीय रिपोर्टों और आंकड़ों के अनुसार, सत्य निकेतन इलाके में पिछले चार वर्षों के भीतर इमारत गिरने की यह दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले 25 अप्रैल 2022 को भी इसी क्षेत्र में एक पुरानी तीन मंजिला इमारत में अवैध मरम्मत कार्य के दौरान बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें दो मजदूरों की जान चली गई थी। बार-बार हो रहे इस तरह के हादसों के कारण इलाके के निवासियों में अपनी सुरक्षा को लेकर गहरा डर और चिंता का माहौल देखा जा रहा है। स्थानीय लोग अब प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ सख्त रुख अपनाने और इस तरह के अवैध व असुरक्षित निर्माणों पर स्थायी रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।
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