देश की राजधानी दिल्ली का तुर्कमान गेट इलाका बुधवार तड़के एक अखाड़े में तब्दील हो गया। जब पूरी दिल्ली सो रही थी, तब रामलीला मैदान के पास स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास बने अवैध अतिक्रमण को जमींदोज करने के लिए प्रशासन का भारी अमला बुलडोजरों के साथ सड़कों पर उतर आया। दिल्ली नगर निगम और पुलिस की इस संयुक्त कार्रवाई का स्थानीय लोगों और बाहरी तत्वों ने हिंसक विरोध किया। देखते ही देखते शांतिपूर्ण दिख रहा इलाका नारों और धमाकों की आवाज से गूंज उठा। हालात इतने बेकाबू हो गए कि बेकाबू भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोलों का सहारा लेना पड़ा। पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया था और चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई थी।
हजारों जवानों का घेरा और बुलडोजरों की गर्जना
इस महा-अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मौके पर दिल्ली पुलिस के 9 जिलों के डीसीपी रैंक के अधिकारियों को मोर्चा संभालने के लिए उतारा गया था। करीब एक हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों के जवान तुर्कमान गेट के चारों ओर एक अभेद्य दीवार बनकर खड़े थे। 15 से ज्यादा जेसीबी मशीनों ने जैसे ही अवैध निर्माण को ढहाना शुरू किया, वहां मौजूद भीड़ उग्र हो गई। मलबे को तुरंत हटाने के लिए 70 से ज्यादा डंपर तैनात थे, ताकि कार्रवाई में कोई बाधा न आए। प्रशासन ने मस्जिद की तरफ जाने वाले तमाम रास्तों को बैरिकेडिंग लगाकर पूरी तरह सील कर दिया था, लेकिन आक्रोशित लोग बार-बार घेरा तोड़ने की कोशिश कर रहे थे।
हिंसा और पुलिस की जवाबी कार्रवाई
जैसे-जैसे बुलडोजर का पंजा अवैध निर्माण पर चला, विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। बैरिकेडिंग के दूसरी तरफ खड़ी भीड़ ने पुलिस पर अचानक पथराव शुरू कर दिया। पथराव इतना भीषण था कि पुलिस को अपनी सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आंसू गैस के गोले और गैस बुलेट छोड़ने पड़े। इलाके में धुएं का गुबार छा गया और धमाकों जैसी आवाजों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। रैपिड एक्शन फोर्स की टुकड़ियों ने उन गलियों में प्रवेश किया जहां से पत्थरबाजी की जा रही थी। इस पूरी कार्रवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ड्रोन कैमरों के जरिए संकरी गलियों और छतों की निगरानी कर रही थी ताकि उपद्रवियों की पहचान की जा सके और किसी भी बड़ी अनहोनी को रोका जा सके।
अदालती आदेश और अवैध ढांचे पर कड़ा रुख
यह पूरी कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश के बाद की गई जिसमें मस्जिद से सटे दवाखाना और बारात घर को अवैध घोषित किया गया था। दिसंबर महीने में एमसीडी की जांच में यह खुलासा हुआ था कि सरकारी जमीन का उपयोग उन ढांचों के लिए किया जा रहा था जो स्वीकृत मानचित्रों का हिस्सा नहीं थे। जांच में पाया गया कि बारात घर का इस्तेमाल निजी आयोजनों के लिए कर अवैध कमाई की जा रही थी। ज्वाइंट सीपी मधुर वर्मा ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने केवल न्यायालय के आदेश का पालन किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि वीडियो फुटेज के आधार पर उन सभी लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने कानून को हाथ में लिया। पुलिस का दावा है कि हिंसा भड़काने वाले ज्यादातर लोग बाहरी थे, जिन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
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