नोएडा पुलिस ने अपराध और अपराधियों के विरुद्ध जारी अपने अभियान में एक ऐसी सफलता हासिल की है जिसने तकनीकी अपराध की दुनिया में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस की विशेष टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए एक ऐसे गिरोह को दबोचा है जो उत्तर प्रदेश के एनसीआर क्षेत्र से लेकर बिहार और झारखंड तक अपने जाल फैलाए हुए था। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कुल 821 मोबाइल फोन बरामद किए हैं जिनकी बाजार में अनुमानित कीमत छह से आठ करोड़ रुपये के बीच आंकी गई है। यह बरामदगी हाल के वर्षों में मोबाइल रिकवरी के सबसे बड़े मामलों में से एक मानी जा रही है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान गोविंदा महतो, रोहित सैनी, श्याम राय, भरतीया महतो, शेखर और प्रदीप के रूप में हुई है जबकि इनके साथ दो नाबालिगों को भी संरक्षण में लिया गया है।

ठिठुरती ठंड और शातिर अंदाज़

​जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस गिरोह ने वारदातों के लिए सर्दी के मौसम को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह अपराधी उन लोगों को अपना निशाना बनाते थे जो ठंड से बचने के लिए भारी जैकेट पहनते हैं। जैकेट की बाहरी जेबों में रखे मोबाइल फोन को निकालना इन शातिर चोरों के लिए बेहद आसान होता था क्योंकि जैकेट के मोटे कपड़े के कारण पीड़ित को स्पर्श का अहसास तक नहीं होता था। यह गिरोह मुख्य रूप से मेट्रो स्टेशनों, बस स्टैंडों और व्यस्त बाजारों को अपना कार्यक्षेत्र बनाता था जहाँ भीड़ का फायदा उठाकर ये पलक झपकते ही कीमती स्मार्टफोन पार कर देते थे। इनकी कार्यप्रणाली इतनी सटीक थी कि एक दिन में दर्जनों फोन चोरी करने के बाद भी ये पुलिस की नजरों से ओझल रहने में माहिर थे।

झारखंड और बिहार का तस्करी कनेक्शन

​नोएडा में चोरी की वारदातों को अंजाम देने के बाद इन मोबाइल फोनों का एक व्यवस्थित सिंडिकेट चलाया जा रहा था। पकड़े गए सभी आरोपी मूल रूप से झारखंड और बिहार के रहने वाले हैं। पुलिस की पूछताछ में यह बात निकलकर सामने आई है कि नोएडा और दिल्ली के इलाकों से फोन इकट्ठा करने के बाद इन्हें सुरक्षित तरीके से बिहार और झारखंड के ग्रामीण इलाकों में भेजा जाता था। वहाँ इन फोनों की पहचान बदलकर या इन्हें पुर्जों के रूप में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता था। इस गिरोह ने तस्करी का एक ऐसा गलियारा तैयार कर लिया था जिससे चोरी का माल कुछ ही घंटों के भीतर राज्य की सीमाओं को पार कर जाता था। इस गिरोह के पकड़े जाने से एनसीआर में सक्रिय मोबाइल स्नेचिंग के कई अन्य नेटवर्क के भी ध्वस्त होने की उम्मीद जगी है।

अपराध के तंत्र पर पुलिस का कड़ा प्रहार

​नोएडा पुलिस की इस कामयाबी ने न केवल अपराधियों के मनोबल को तोड़ा है बल्कि आम जनता के बीच सुरक्षा का विश्वास भी पैदा किया है। पुलिस कमिश्नरेट ने इस मामले की तह तक जाने के लिए कई टीमों का गठन किया था जो पिछले काफी समय से इन संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रख रही थीं। गिरफ्तार आरोपियों के पास से बरामद फोनों की सूची तैयार की जा रही है ताकि उनके वास्तविक मालिकों तक पहुँच बनाई जा सके। पुलिस अब इस गिरोह के उन मददगारों की तलाश कर रही है जो इन चोरी के फोनों को आगे खपाने में वित्तीय मदद प्रदान करते थे। पुलिस प्रशासन ने चेतावनी दी है कि सार्वजनिक स्थानों पर सक्रिय ऐसे किसी भी गिरोह को बख्शा नहीं जाएगा और आने वाले दिनों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा किया जाएगा।


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