दिल्ली विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज उस समय अखाड़े में तब्दील हो गया जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मर्यादाओं की सारी सीमाएं टूट गईं। सत्र के अंतिम दिन की शुरुआत ही भारी शोर-शराबे और व्यक्तिगत हमलों के साथ हुई। भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने सदन के भीतर आक्रामक रुख अपनाते हुए आम आदमी पार्टी की कद्दावर नेता और सदन में विपक्ष की आवाज कही जाने वाली आतिशी को सीधे निशाने पर लिया। भाजपा का आरोप है कि आतिशी ने सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी के विरुद्ध अमर्यादित और आपत्तिजनक शब्दावली का प्रयोग किया है। इस मुद्दे को लेकर भाजपा विधायकों ने सदन की गैलरी में बैठकर जोरदार प्रदर्शन किया और मांग की कि आतिशी को न केवल सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए, बल्कि उनकी विधानसभा सदस्यता भी तत्काल प्रभाव से रद्द की जानी चाहिए। सदन के भीतर का माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि विधायकों के बीच तीखी बहस हाथापाई की नौबत तक पहुंचती दिखी।

आतिशी का पलटवार और भाजपा पर साजिश के गंभीर आरोप

भाजपा के इन तीखे हमलों के बीच आतिशी ने सोशल मीडिया के माध्यम से मोर्चा संभाला और भाजपा पर पलटवार करते हुए इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया। आतिशी ने स्पष्ट रूप से कहा कि भाजपा सिख समाज और गुरुओं के प्रति नफरत से भरी हुई है और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए एक 'फर्जी वीडियो' का सहारा ले रही है। उन्होंने तर्क दिया कि जिस वीडियो को आधार बनाकर भाजपा हंगामा कर रही है, वह वास्तव में उस समय का है जब एलजी के अभिभाषण पर चर्चा हो रही थी, न कि गुरु साहिब की शहीदी की चर्चा के दौरान। आतिशी ने आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है ताकि दिल्ली के ज्वलंत मुद्दों जैसे प्रदूषण और आवारा कुत्तों की समस्या पर होने वाली चर्चा से ध्यान भटकाया जा सके। उन्होंने भाजपा की इस हरकत को घिनौनी राजनीति बताते हुए कहा कि वह किसी भी दबाव में झुकने वाली नहीं हैं।

कपिल मिश्रा और केजरीवाल के बीच जुबानी जंग का नया अध्याय

सदन की आग में घी डालने का काम मंत्री कपिल मिश्रा के बयानों ने किया। कपिल मिश्रा ने सदन के भीतर बेहद सख्त लहजे में आतिशी को 'भगोड़ा' करार दिया। उन्होंने कहा कि गुरुओं का अपमान करने के बाद आतिशी में सदन का सामना करने की हिम्मत नहीं बची है और वह एक पेशेवर अपराधी की तरह कार्यवाही से भाग रही हैं। मिश्रा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी इस विवाद में घसीटते हुए कहा कि केजरीवाल इस पाप में आतिशी को बचाकर खुद अपराधी बन रहे हैं। उन्होंने इसे 'चोरी और ऊपर से सीना जोरी' का मामला बताते हुए कहा कि गुरुओं का अपमान करने वालों को ईश्वर कभी माफ नहीं करेगा। कपिल मिश्रा के इस कड़े रुख के जवाब में आम आदमी पार्टी के विधायकों ने सदन के भीतर ही मोर्चा खोल दिया और हाथ में तख्तियां लेकर कपिल मिश्रा के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी।

अध्यक्ष की बेबसी और सदन की कार्यवाही का बार-बार स्थगन

विधानसभा अध्यक्ष के लिए सदन को सुचारू रूप से चलाना नामुमकिन साबित हो रहा था। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जैसे ही नारेबाजी तेज हुई, अध्यक्ष ने इसे ३० मिनट के लिए स्थगित कर दिया। लेकिन जब दोबारा कार्यवाही शुरू हुई, तो भाजपा विधायक अध्यक्ष के आसन के बिल्कुल करीब पहुंच गए और "गुरुओं का अपमान नहीं सहेंगे" के नारे लगाने लगे। गतिरोध इतना बढ़ गया कि अध्यक्ष को प्रवेश वर्मा, अभय वर्मा और अन्य प्रमुख नेताओं को अपने कक्ष में बुलाकर सुलह की कोशिश करनी पड़ी। हालांकि, यह कोशिश भी नाकाम रही क्योंकि दोनों ही पक्ष झुकने को तैयार नहीं थे। आम आदमी पार्टी के विधायक जहां कपिल मिश्रा के निलंबन और इस्तीफे पर अड़े थे, वहीं भाजपा आतिशी की सदस्यता रद्द करने की मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं थी। सदन के आखिरी दिन जनता के मुद्दों पर चर्चा होने के बजाय केवल राजनीतिक प्रतिशोध की ज्वाला ही जलती नजर आई।


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दिल्ली की सियासत में सिख अस्मिता का नया चुनावी मोड़

इस पूरे विवाद ने दिल्ली की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। आगामी चुनावों और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए दोनों ही दल सिख समुदाय की भावनाओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा इस मुद्दे को गुरुओं के अपमान से जोड़कर 'आप' को हिंदू और सिख विरोधी साबित करने में जुटी है, वहीं आम आदमी पार्टी इसे भाजपा की 'वीडियो फैक्ट्री' का एक और फर्जी उत्पाद बताकर जनता के बीच जाने की तैयारी में है। सत्र के अंत तक सदन में कोई ठोस विधायी कार्य नहीं हो सका और शीतकालीन सत्र हंगामे की भेंट चढ़कर समाप्त हो गया। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि दिल्ली विधानसभा अब विकास की चर्चा से ज्यादा राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई का केंद्र बन चुकी है।

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