दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत 9वीं कक्षा की छात्राओं के लिए संचालित साइकिल वितरण योजना को लेकर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखा जुबानी तीर चलने लगा है। आम आदमी पार्टी ने इस योजना की खरीद प्रक्रिया और जारी किए गए टेंडर को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का दावा है कि छात्राओं के प्रोत्साहन के लिए बनाई गई इस योजना में नियमों को ताक पर रखकर बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया है।
पार्टी के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान सरकारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि साइकिलों की खरीद के दौरान तय की गई निविदा शर्तों में कई तकनीकी बदलाव किए गए। आरोप के अनुसार, टेंडर में जिस गुणवत्ता और मॉडल की साइकिल के लिए राशि स्वीकृत की गई थी, धरातल पर उसकी जगह कम कीमत वाले मॉडल की आपूर्ति की गई। दावा किया गया है कि वास्तविक बाजार दर की तुलना में अत्यधिक ऊंची दरों पर वर्क ऑर्डर जारी किए गए, जिससे जनता के पैसों का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ।
आम आदमी पार्टी का कहना है कि टेंडर की पात्रता शर्तों को भी इस प्रकार बदला गया जिससे कुछ चुनिंदा आपूर्तिकर्ताओं को ही प्रतिस्पर्धा में जगह मिल सके। पार्टी ने आरोप लगाया कि कम कीमत वाले साइकिल मॉडल पर अधिक कीमत वाले मॉडल के स्टीकर लगाकर उन्हें छात्राओं में वितरित करने की कोशिश की गई है। इस पूरे मामले को पारदर्शी सार्वजनिक खरीद नीति का स्पष्ट उल्लंघन बताते हुए पार्टी ने निष्पक्ष प्रशासनिक जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग उठाई है।
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर सत्तारूढ़ पक्ष की तरफ से प्रतिक्रिया देते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया गया है। सरकारी प्रवक्ताओं का कहना है कि टेंडर और खरीद की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और स्थापित मानकों के तहत पूरी की गई है। उनका तर्क है कि साइकिलों की तकनीकी विशेषताओं और गुणवत्ता जांच के बाद ही अंतिम भुगतान को स्वीकृति दी जाती है। प्रशासन का कहना है कि विपक्षी दल जनहित की इस योजना की छवि धूमिल करने के लिए मनगढ़ंत और राजनीतिक रूप से प्रेरित दावे कर रहा है।
---समाप्त---