दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे एक बहुमंजिला छात्र पीजी इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई। हादसे के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। मलबे से अब तक 10 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है, जिनमें से 6 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। अस्पताल में भर्ती कई अन्य घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है।

​मकान मालिक पर गैर-इरादतन हत्या की कठोर एफआईआर

​हादसे के बाद पुलिस ने इस गंभीर लापरवाही पर सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस उपायुक्त (दक्षिण-पश्चिम) अमित गोयल ने बताया कि दक्षिण परिसर पुलिस स्टेशन में भवन मालिक हरिराम और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 290 (भवन गिराने, मरम्मत करने या निर्माण करने के संबंध में लापरवाहीपूर्ण आचरण) और 125 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कृत्य) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

​मौके पर राहत और रेस्क्यू का काम जारी


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​घटना के बाद से ही एनडीआरएफ, दमकल विभाग, दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत कार्य में जुटीज हुई हैं। संकरी गलियां होने के कारण भारी मशीनरी का इस्तेमाल संभलकर करना पड़ रहा है ताकि मलबे में दबे किसी भी व्यक्ति को और नुकसान न पहुंचे। बचाव दल के सदस्य लगातार मलबे को हटाकर फंसे हुए लोगों की तलाश कर रहे हैं।

​सुरक्षा मानकों को लेकर उठ रहे गंभीर सवाल

​यह हादसा केवल एक इमारत गिरने की खबर नहीं है, बल्कि यह हॉस्टल और पीजी संचालकों की ओर से की जाने वाली सुरक्षा अनदेखी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। देश के कोने-कोने से छात्र अपने उज्ज्वल भविष्य का सपना लेकर दिल्ली आते हैं। मुनाफा कमाने के चक्कर में सुरक्षा नियमों की अनदेखी मासूमों की जान पर भारी पड़ रही है। अब मांग उठ रही है कि छात्र क्षेत्रों के सभी पीजी और हॉस्टलों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।

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